अब कुशवाहा के बेटे का मंत्री पद जाना पक्का! 2027 तक करना होगा इंतजार

बिहार विधान परिषद के नामांकन का सोमवार अंतिम दिन है. उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश अगर एमएलसी चुनाव के लिए नहीं उतरते हैं तो फिर उनके मंत्री पद से छुट्टी होना तय है. इसकी वजह यह है कि बिना किसी सदन से मंत्री बने थे.

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उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में है (Photo-RLM) उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में है (Photo-RLM)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

बिहार की 10 विधान परिषद (एमएलसी) सीटों के नामांकन का सोमवार अंतिम दिन है. एनडीए के तीनों प्रमुख दलों की तरफ से 9 उम्मीदवार मैदान में है, जिसमें बीजेपी और जेडीयू से चार-चार तो चिराग पासवान की एलजेपी (आर) ने एक उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में सभी की निगाहें उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पर है, जिन्हें एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से उनके मंत्री पद पर संकट गहरा गया है. 

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बीजेपी ने भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह के अलावा डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है. जेडीयू की तरफ से नीतीश के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार,  ललन प्रसाद, भारती मंडल और शिवरानी देवी पर भरोसा जताया है. 

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है. अशरफ अंसारी के मैदान में आने से चुनावी समीकरणों में एक नया आयाम जुड़ गया है. इसके अलावा आरजेडी ने सुनील कुमार सिंह पर भरोसा जताया है. ऐसे में सियासी दर्द उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के खाते में आया है, क्योंकि विधान परिषद नहीं बनने पर मंत्री पद गंवाना पड़ सकता है. 

बिहार एमएलसी चुनाव में क्या होगा?
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें 9 सीटें छह साल के लिए हैं और एक सीट पर उपचुनाव हो  रहा है. यह उपचुनाव नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से सीट खाली हुई है. इस तरह 9 सीट पर अलग वोटिंग होती और उपचुनाव के लिए अलग चुनाव होंगे. 

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विधान परिषद चुनाव की संख्या बल की गणित के लिहाज से बीजेपी और जेडीयू की 4-4 सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट चिराग पासवान की पार्टी जीत सकती है. एक सीट विपक्ष आसानी से जीत लेगी. एमएलसी की एक सीट जीत के लिए करीब 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. आरजेडी के पास 25 विधायक है और कांग्रेस और बसपा विधायक के सहारे जीत लेगी.

जेडीयू-बीजेपी-चिराग की राह आसान
बिहार की 10 सीटों में से 9 सीट पर निर्विरोध चुनाव हो सकता है और एक सीट पर उपचुनाव है. उपचुनाव वाली सीट पर जेडीयू की दावेदारी है. एनडीए में 8 वीं, सीट, जिस पर निर्विरोध चुनाव होना है, वो चिराग पासवान की (आर) के खाते में चला गई है. इस पर लोजपा (आर) के सुप्रीमो चिराग पासवान ने अपने भरोसेमंद नेता अशरफ अंसारी को विधान परिषद भेजने का फैसला किया है.  

वहीं, विपक्ष के खाते में सिर्फ एक सीट जा सकती है. विधान परिषद चुनाव में विधायकों की संख्या बल की गणित विपक्ष के लिए आसान दिख रही है. एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 28 विधायकों के समर्थन चाहिए. आरजेडी के पास अपने 25 विधायक हैं. ऐसे में उसे कांग्रेस, AIMIM और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन जीत सकती है. 

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उपेंद्र कुशवाहा के बेटे का क्या होगा? 
विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद आरएलएम के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की सियासी राह काफी मुश्किल भरी हो गई है. दीपक प्रकाश बिहार की सम्राट सरकार में मंत्री हैं, लेकिन न ही विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य है. एनडीए में भी एमएलसी के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया गया, जिसके चलते उनके मंत्री पद पर संकट गहरा गया है. 

एनडीए में एलजेपी (आर) ने जैसे ही अपने कैंडिडेट अशरफ अंसारी के नाम का ऐलान किया तो ये तय हो गया कि बिहार की एमएलसी की आखिरी सीट उनके खाते में चली गई है. ऐसे में 10वीं सीट बच रही है, जिसके लिए एनडीए के पास दो ही वोट है जबकि महागठबंधन के पास AIMIM को छोड़कर भी 36 वोट हैं.

2027 तक क्या करना होगा इंतजार
 
राज्यसभा चुनाव की तरह आरजेडी के एक और कांग्रेस के 3 विधायक वोट नहीं भी करते हैं तो तेजस्वी यादव के पास महागठबंधन विधायकों के 32 वोट होंगे, जो कि जरूरी 25 वोटों से 7 वोट ज्यादा ही हैं. उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश अगर उतरते हैं तो उन्हें 23 अतरिक्त वोट जुटाने होंगे. ये नंबर जुटाना आसान नहीं है. ऐसे में दीपक प्रकाश के लिए मंत्री पद को बचाए रखना मुश्किल होगा? 

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दीपक प्रकाश के लिए अभी उम्मीद नहीं है. ऐसे में अगर उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे की कुर्सी बीजेपी के रहम पर बचाए रख सकते हैं. इसके लिए उन्हें  उन्हें मार्च 2027 तक इंतजार करना होगा. मार्च में राज्यपाल के द्वारा मनोनयन के जरिए 12 और लोग सदस्य एमएलसी बनेंगे. तब दीपक प्रकाश को उसके जरिए विधान परिषद में भेजा जा सकता है. 
 

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