Trump's Auto Tarrif: 'भारत हमसे 70% लेता है', कारों पर ट्रंप ने लगाया 25% रेसिप्रोकल टैरिफ, किन कंपनियों पर असर?

Trump's Tarrif: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल (कार, बाइक्स) पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल (पारस्परिक) टैरिफ की घोषणा की है. ट्रंप ने कहा कि, भारत हमसे 70% टैरिफ वसूलता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इस टैरिफ का भारतीय ऑटो इंडस्ट्री पर कितना असर होगा.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST

Trump's Tarrif On Auto Industry: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल (कार, बाइक्स) पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल (पारस्परिक) टैरिफ की घोषणा की है. ट्रंप ने यह तर्क दिया कि, संयुक्त राज्य अमेरिका दशकों से वैश्विक व्यापार में नुकसान में रहा है. उन्होंने दावा किया कि यह कदम अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नया जीवन देगा और असंतुलित होते अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को फिर से ठीक करने में मदद करेगा.

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ट्रम्प ने व्हाइट हाउस रोज गार्डन से अपने भाषण के दौरान कहा, "दशकों से, हमारे देश को निकट और दूर के देशों, दोस्तों और दुश्मनों दोनों द्वारा लूटा गया." उन्होंने इस तरह की व्यापार असमानताओं को जारी रहने देने के लिए पिछले अमेरिकी नेताओं को दोषी ठहराया. ट्रंप ने अपने इस नए टैरिफ प्लान को ग्लोबल ट्रेड के लिए सबसे उचित करार दिया.

ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ इंफ्रा में कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अमेरिका मोटरसाइकिलों पर केवल 2.4 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, जबकि अन्य देश इससे कहीं अधिक टैरिफ लगाते हैं. उन्होंने कहा, "थाईलैंड और अन्य देश बहुत अधिक कीमत वसूल रहे हैं - जैसे 60 प्रतिशत. भारत 70 प्रतिशत टैरिफ लगाता है. वियतनाम 75 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, और अन्य देश तो इससे भी अधिक टैरिफ लगाते हैं."

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डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के अंतरों के बारे में कहा कि, "आज तक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने दशकों तक विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल पर 2.5 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. यूरोपीय संघ हमसे 10 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लेता है, और उनके पास 20 प्रतिशत वैट भी है. जो बहुत, बहुत अधिक है." ट्रंप ने इस नए टैरिफ प्लान को अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बहुत ही जरूरी बताया.

ट्रंप के टैरिफ में क्या है शामिल...

रायर्टस के मुताबिक ट्रम्प के 25% ऑटो टैरिफ से सालाना 460 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के वाहनों और ऑटो पार्ट्स के आयात को कवर किया जाएगा. ट्रम्प का ये ऑटो टैरिफ प्लान लगभग 150 ऑटो पार्ट्स कैटेगरी को प्रभावित करेगा. जो 3 मई से टैरिफ का सामना करेंगी. नए टैरिफ में कार, हल्के ट्रक, इंजन, ट्रांसमिशन, लिथियम-आयन बैटरी, टायर, शॉक एब्जॉर्बर और स्पार्क प्लग वायर सहित अन्य कई कंपोनेंट्स शामिल हैं.

इस लिस्ट में टैरिफ कोड के अंतर्गत आने वाले ऑटोमोटिव कंप्यूटर भी शामिल हैं, जिसमें लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर और डिस्क ड्राइव सहित सभी कंप्यूटर प्रोडक्ट को शामिल किया गया है. अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इस कैटेगरी में 138.5 बिलियन डॉलर का आयात हुआ था. इस कैटेगरी को छोड़कर कुल अमेरिकी वाहन और पुर्जों का आयात 459.6 बिलियन डॉलर था. 

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इन कंपनियों पर असर...

डोनाल्ड ट्रंप का ये नया टैरिफ प्लान दुनिया भर के ऑटो सेक्टर को प्रभावित कर रहा है. इस टैरिफ जापान, कोरिया और जर्मनी के ऑटो इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा. क्योंकि यहां की टोयोटा, मर्सिडीज बेंज, बीएमडब्ल्यू, हुंडई और फॉक्सवैगन जैसी तमाम दिग्गज कार कंपनियां अपने वाहनों को अमेरिका में निर्यात करती हैं. लेकिन भारतीय कंपनियों पर इसका कितना असर होगा ये समझना जरूरी है. 

कुछ भारतीय कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स, महिंद्रा और आयशर मोटर्स पर इस टैरिफ का असर पड़ सकता है. क्योंकि अमेरिका में टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंडरोवर और आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड की बाइक्सी की खूब डिमांड है. लेकिन यहां यह भी देखना जरूरी है कि अमेरिका में बेची जाने वाली JLR की ज्यादातर कारों का निर्माण या तो यूके में होता है या यूरोप में. इसलिए सीधे तौर पर भारत से अमेरिका में इन वाहनों का निर्यात नहीं किया जाता है. हालांकि कंपनी का स्वामित्व टाटा मोटर्स के पास है तो वाहनों की बिक्री प्रभावित होती है तो इसका असर कंपनी के रेवेन्यू पर जरूर पड़ेगा.

इसके अलावा महिंद्रा भी अपने वाहनों की बिक्री अमेरिका के कुछ हिस्सों में करता है. साल 2023 में, भारत ने US को 37.14 मिलियन डॉलर वैल्यू के मोटर वाहन निर्यात किए गए थे. भारत अब तक विदेशों से आने वाली गाड़ियों पर 100 फीसदी से ज्यादा शुल्क वसूल करता रहा है. इस टैरिफ के चलते भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली गाड़ियों के महंगे होने से कंपनियों की सेल्स घट सकती है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि टैरिफ का असर ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों पर ज्यादा होगा.

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कंपोनेंट मेकर्स पर तगड़ा असर...

कई भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियां अमेरिका में निर्यात करती हैं. ऐसे में यह नया टैरिफ उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. आंकड़ों पर गौर करें तो फाइनेंशियल ईयर 2024 में भारत से अमेरिका को 6.79 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए गए थें. जबकि अमेरिका से भारत को 1.4 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स 15% ड्यूटी पर आयात किए गए थे. इससे पहले तक अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स पर ज़ीरो टैरिफ लगाता था, लेकिन अब यह नीति बदल गई है और इसका सीधा असर ऑटो पार्ट्स निर्माताओं पर पड़ेगा. समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल देश की प्रमुख ऑटो पार्टस निर्माता कंपनी है जो बड़े पैमाने पर अमेरिका में एक्सपोर्ट करती है. इसके अलावा सोना बीएलडब्ल्यू जैसी कंपनियां भी इससे प्रभावित होंगी.

 

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