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सितंबर-अक्टूबर में मुनाफे का सौदा है ये खेती, कुछ महीनों में ही लखपति बन जाएंगे किसान

कभी केवल महंगे होटलों और बड़े शहरों में बिकने वाली स्ट्रॉबेरी अब किसानों की आय का नया जरिया बन गई है. मौसम का सही चुनाव और थोड़ी तकनीकी समझ किसानों को कम जमीन से भी बड़ा मुनाफा दिला सकती है.

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स्‍ट्रॉबेरी की खेती से बंपर मुनाफा (File Photo)
स्‍ट्रॉबेरी की खेती से बंपर मुनाफा (File Photo)

स्वादिष्ट और आकर्षक स्ट्रॉबेरी अब केवल पहाड़ी क्षेत्रों की विशेषता नहीं रही बल्कि ये फल अब मैदानी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार में भी उगाया जा रहा है, जिससे किसानों को कम समय में भारी लाभ का रास्ता खुल गया है. हमारे सहयोगी किसान तक ने इसके बारे में विस्तार से बताया है. आइये जानते हैं.

उपयुक्त समय: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में स्ट्रॉबेरी की रोपाई का उत्तम समय सितंबर से नवंबर तक का है.

मिट्टी और उसकी किस्म: रेतीली दोमट मिट्टी और हल्का अम्लीय (pH 5.7–6.5) वातावरण इस फसल के लिए आदर्श माने जाते हैं. प्रमुख किस्मों में 'कैमारोसा', 'चार्ली चांडलर' और 'विंटर डॉन' शामिल हैं.

खेती की तैयारी और विधि

  • खेत तैयार करें: पहले गहरी जुताई करें और 20-25 टन/हेक्टेयर सड़ी-गोबर की खाद मिलाएं. 
  • रोपाई तकनीक: पौधों को 30 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपें और क्राउन को मिट्टी की सतह पर ही रखें. इससे विकास में व्यवधान नहीं आता.
  • सिंचाई और मल्चिंग: नई रोपाई के बाद हल्की लेकिन नियमित सिंचाई जरूरी है. मल्चिंग से नमी बनी रहती है, पाला और खरपतवार से सुरक्षा मिलती है. इसमें पुआल या प्लास्टिक फिल्म का उपयोग सर्वोत्तम है.
  • खाद–उर्वरक: प्रति एकड़ लगभग 8–10 किलोग्राम नाइट्रोजन, 16–20 किलोग्राम फॉस्फोरस और 24–32 किलोग्राम पोटाश देना लाभदायक होता है.
  • कीट एवं रोग प्रबंधन: थ्रिप्स, लैही, ग्रे मोल्ड और एन्थ्रेक्नोज जैसी चुनौतियों से बचने के लिए प्रभावी निगरानी और समय पर उपचार जरूरी है.

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लाभ और पैदावार की संभावनाएं

उपज और लाभ: एक अच्छी तरीके से प्रबंधित खेत से 30–50 क्विंटल प्रति एकड़ तक स्ट्रॉबेरी की उपज मिल सकती है. लागत करीब 2–2.5 लाख रुपए होती है, लेकिन बाजार में अच्छी कीमत मिलने पर शुद्ध मुनाफा 4–5 लाख रुपए प्रति एकड़ हो सकता है.

एक्स्पर्ट्स के मुताबिक, अगर सितंबर–अक्टूबर में स्ट्रॉबेरी की खेती की जाए  तो यह फसल कम समय, न्यून लागत और उन्नत विधियों से भारी मुनाफे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. सही मिट्टी, किस्म और तकनीकी प्रबंधन से यह खेती वास्तव में किसानों को लखपति बना सकती है.
 

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