स्वादिष्ट और आकर्षक स्ट्रॉबेरी अब केवल पहाड़ी क्षेत्रों की विशेषता नहीं रही बल्कि ये फल अब मैदानी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार में भी उगाया जा रहा है, जिससे किसानों को कम समय में भारी लाभ का रास्ता खुल गया है. हमारे सहयोगी किसान तक ने इसके बारे में विस्तार से बताया है. आइये जानते हैं.
उपयुक्त समय: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में स्ट्रॉबेरी की रोपाई का उत्तम समय सितंबर से नवंबर तक का है.
मिट्टी और उसकी किस्म: रेतीली दोमट मिट्टी और हल्का अम्लीय (pH 5.7–6.5) वातावरण इस फसल के लिए आदर्श माने जाते हैं. प्रमुख किस्मों में 'कैमारोसा', 'चार्ली चांडलर' और 'विंटर डॉन' शामिल हैं.
खेती की तैयारी और विधि
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लाभ और पैदावार की संभावनाएं
उपज और लाभ: एक अच्छी तरीके से प्रबंधित खेत से 30–50 क्विंटल प्रति एकड़ तक स्ट्रॉबेरी की उपज मिल सकती है. लागत करीब 2–2.5 लाख रुपए होती है, लेकिन बाजार में अच्छी कीमत मिलने पर शुद्ध मुनाफा 4–5 लाख रुपए प्रति एकड़ हो सकता है.
एक्स्पर्ट्स के मुताबिक, अगर सितंबर–अक्टूबर में स्ट्रॉबेरी की खेती की जाए तो यह फसल कम समय, न्यून लागत और उन्नत विधियों से भारी मुनाफे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. सही मिट्टी, किस्म और तकनीकी प्रबंधन से यह खेती वास्तव में किसानों को लखपति बना सकती है.