इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने बुधवार को रूस से यूक्रेन में जंग रोकने को कहा है. यह आदेश देने वाले जजों में एक भारतीय जज भी शामिल हैं. उनका फैसला चर्चा में इसलिए है क्योंकि अबतक भारत ने इस युद्ध में न्यूट्रल रुख अपनाते हुए रूस या यूक्रेन किसी का भी साथ नहीं देने का मन बनाया हुआ है.
International Court of Justice के आदेश को कुल 13 जजों ने सपोर्ट किया. वहीं दो जजों ने इसका विरोध किया. विरोध करने वाले में ICJ के उपाध्यक्ष Kirill Gevorgian (रूसी) और जज Xue Hanqin (चीनी नागरिक) शामिल हैं.
दरअसल, बुधवार को इंटरनेशनल कोर्ट ने रूस को यूक्रेन में अपने मिलिट्री ऑपरेशन को तुरंत खत्म करने का आदेश दिया है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी इस आदेश का स्वागत किया है.
अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने इसे एक महत्वपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि ICJ ने स्पष्ट रूप से रूस को अपने सैन्य अभियानों को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया है. भारतीय मूल के जस्टिस दलवीर भंडारी ने इस आदेश का समर्थन करते हुए रूस के खिलाफ मतदान किया.
अमेरिका की ओर से की गई ये अपील
प्राइस ने कहा कि हम अदालत के आदेश का स्वागत करते हैं और रूसी संघ से आदेश का पालन करने, यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों को तुरंत बंद करने और यूक्रेन में निर्बाध मानवीय पहुंच स्थापित करने का आह्वान करते हैं.
प्राइस ने कहा कि अपने फैसले में कोर्ट ने राज्यों को युद्ध के कानूनों सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों के अनुरूप काम करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कोर्ट संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
इंटरनेशनल कोर्ट ने व्यक्त की चिंता
प्राइस ने कहा कि कोर्ट ने यूक्रेन में क्रेमलिन की कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप कई नागरिक की मौतों, घायलों और इमारतों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विनाश सहित महत्वपूर्ण सामग्री क्षति के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है.
उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी देखा कि उसके पास रूस के दावों की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं है कि यूक्रेन की ओर से डोनबास क्षेत्र में नरसंहार किया गया था. यूक्रेन का तर्क है कि यूक्रेन के खिलाफ नरसंहार का रूसी यूनियन का आरोप सिर्फ रूस की गैरकानूनी आक्रामकता का एक बहाना है.
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