बेलारूस के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बालियात्स्की को 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है. अदालत ने उन्हें सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को फाइनेंस करने का दोषी ठहराया गया है. यूरोपीय यूनियन ने बेलारूस सरकार के इस कदम की आलोचना की है.
एलेस (60) को मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए उनके कार्यों की वजह से पिछले साल अक्टूबर में शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनके समर्थकों का कहना है कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की सरकार उन्हें जबरदस्ती चुप कराना चाहती है.
सोशल मीडिया पर वायरल मिंस्क अदालत की फुटेज में देखा जा सकता है कि वियास्ना मानवाधिकार केंद्र के सह-संस्थापक एलेस (60) के दोनों हाथ हथकड़ियों में बंधे हुए हैं और वह कोर्टरूम के कटघरे से अदालती कार्यवाही को देख रहे हैं.
बता दें कि एलेन को 2021 में भी गिरफ्तार किया गया था. वह और उनके तीन और सहयोगियों पर प्रोटेस्ट को फाइनेंस करने और पैसों की तस्करी का आरोप लगाया गया था.
बेलारूस की सरकारी न्यूज एजेंसी ने पुष्टि की है कि अदालत ने एलेन के साथ उनके तीन और साथियों को भी जेल भेजा गया है. हालांकि, एलेन ने उन पर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं.
एलेन के तीन साथी कार्यकर्ताओं को भी जेल
बेलारूस के निर्वासित विपक्षी नेता स्वेतलाना ने कहा कि एलेन और तीन अन्य कार्यकर्ताओं पर गलत आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने अदालत के फैसले को भयावह बताते हुए कहा कि हमें इस शर्मनाक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और उन्हें आजाद कराने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए.
नोबेल पुरस्कार विजेता एलेस बालियात्स्की के अलावा जिन लोगों को सजा सुनाई गई, उनमें वियासना ह्यूमन राइट्स के डिप्टी चेयरमैन वैलेंटसिन स्टेफनोविच, व्लादिमीर लाबकोविच और दमित्री सोलोवयोव को नौ-नौ साल की सजा सुनाई गई है.
यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति के प्रमुख जोसेफ बॉरेल ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं को चुप कराने के लिए यह मनगढ़ंत आरोप लगाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया है. लेकिन लुकाशेंको को इसमें सफलता नहीं मिलेगी.आजादी के लिए हमारी आवाज इतनी तेज है कि इसे सलाखों के पीछे भी सुना जा सकता है.
जर्मनी ने भी की बेलारूस सरकार की आलोचना
वहीं, जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने भी इस कोर्ट ट्रायल को तमाशा करार देते हुए कहा कि मिंस्क सरकार नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का सहारा ले रही है. यह उतना ही अपमानजनक है, जितना लुकाशेंको का यूक्रेन युद्ध में पुतिन का समर्थन करना है.