चीन में भी कई ऐसे जातीय समूह बसते हैं. इनकी सांस्कृति काफी अनूठी और अलग-अलग होती है. इनमें से कईयों के रीति-रिवाज को काफी अजीब होते हैं. बाओआन ऐसा ही एक जातीय समूह है. इस समूह में शादी के दौरान एक रस्म निभाई जाती है, जिसमें लड़की के पिता को लड़के का पिता कोड़े मारता है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक,चीन के बाओआन जातीय समूह में "ससुर को कोड़े मारना" नामक एक अनोखी विवाह रस्म है. इसमें दूल्हे का परिवार प्रतीकात्मक रूप से दुल्हन के पिता को 20 बार कोड़े मारता है. शादी के तीन दिनों के दौरान, दूल्हे के परिवार के आंगन में दुल्हन के पिता को घुटने टेककर रस्म के तौर पर 'सजा' दी जाती है. इस रस्म में कालिख पोतने की प्रथा भी शामिल है.
अपनी सजा भुगतते हुए, दुल्हन का पिता घुटनों के बल बैठकर अपनी बेटी को ठीक से अनुशासित करने में विफल रहने के लिए माफी मांगता है. बाओआन जातीय समूह मुख्य रूप से उत्तर पश्चिमी चीन के गांसू प्रांत में रहता है और इसकी आबादी लगभग 24,000 है. वे इस्लाम धर्म का पालन करते हैं और बानान भाषा बोलते हैं, जो अल्ताई लैंग्वेज फैमिली से संबंधित है.
वैसे तो येलोग कई पारंपरिक मुस्लिम त्योहारों और विवाह संबंधी रीति-रिवाजों का पालन करते हैं, लेकिन, शादी के लिए एकविवाह प्रथा का अनुसरण करते हैं. एक विशिष्ट बाओआन विवाह में चार मुख्य चरण शामिल होते हैं: संबंध निर्धारण, सगाई की पुष्टि, दुल्हन की कीमत का भुगतान और विवाह समारोह.
ऐसे तय होती हैं शादियां
जब दूल्हे का परिवार शादी का प्रस्ताव रखता है, तो वे सोंगडिंगचा नामक एक गिफ्ट देते हैं. इसका शाब्दिक अर्थ है "सगाई की चाय". इसमें मिश्री, सूखे लौंग, चाय की पत्तियां और अखरोट शामिल होते हैं, जो सभी चार अलग-अलग रंगों के कागजों में लपेटे जाते हैं.यदि दुल्हन का परिवार उपहार स्वीकार कर लेता है, तो इसका मतलब है कि दोनों परिवारों के बीच एक औपचारिक समझौता हो गया है.
बाओआन जातीय समूह की पारंपरिक शादी की रस्म तीन दिनों तक चलती है. सबसे विशेष और अलग रीति-रिवाजों में से एक है - ससुर को कोड़े मारने की रस्म है, जो मुख्य रूप से उत्तर-मध्य चीन के गांसू प्रांत के जिशिशान काउंटी के बाओआन समुदायों में मनाई जाती है.
दूल्हे के पिता को कालिख लगाती हैं दुल्हन की बहनें
शादी के दिन, दुल्हन के परिवार की कई युवतियां जैसे उनकी बहनें और भतीजियां दूल्हे के साथ उसके घर जाती हैं और मजाक में खाना पकाने के बर्तन से कालिख निकालकर दूल्हे के पिता के चेहरे पर लगा देती हैं. यह बधाई देने का प्रतीक होता है. इसी बीच, दूल्हे के पिता को दुल्हन के घर आमंत्रित किया जाता है और उन्हें आंगन में बैठाया जाता है.
इसके बाद दुल्हन के पिता उनका स्वागत करने के लिए बाहर आते हैं. वो न केवल शिष्टाचार का परिचय देते हैं बल्कि अपनी बेटी का सही ढंग से पालन-पोषण नहीं कर पाने और उन्हें अनुशासित नहीं कर पाने के लिए औपचारिक रूप से माफी भी मांगते हैं. इसे विनम्रता दिखाने का एक तरीका माना जाता है, न कि यह शाब्दिक रूप से कहना कि उनकी बेटियां अनुशासनहीन या बुरे व्यवहार वाली हैं.
बेटियों की गलती के लिए कोड़े खाता है पिता
अपनी ईमानदारी दिखाने के लिए, दुल्हन के पिता दूल्हे के पिता के सामने घुटने टेकते हैं और सजा स्वीकार करने की अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं. इसके बाद दूल्हे का पिता पहले से मेज पर रखी हुई चाबुक उठाता है और घर लौटने से पहले उसे 20 बार बुरी तरह पीटने का नाटक करता है.
यह प्रतीकात्मक और नाटकीय समारोह के अंत का प्रतीक है. दुल्हन के दूल्हे के घर पहुंचने के बाद, शादी के भोज के लिए मेहमान बैठ जाते हैं, लेकिन दुल्हन वहां मौजूद नहीं होती है. परंपरा के अनुसार, उसे पहले तीन दिनों तक दूल्हे के परिवार द्वारा तैयार किया गया कोई भी भोजन खाने से परहेज करना चाहिए. इसके बजाय, वह केवल अपने घर से लाया भोजन ही खाती है.यह प्रथा माता-पिता के प्यार और पालन-पोषण के प्रति कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में काम करती है.