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रणजी ट्रॉफी: वानखेड़े में पहले दिन ही बोली मुंबई की तूती

घरेलू वानखेड़े स्टेडियम में सौराष्ट्र के साथ जारी रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले के पहले ही दिन गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर मुंबई ने अपनी पकड़ बना ली है.

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घरेलू वानखेड़े स्टेडियम में सौराष्ट्र के साथ जारी रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले के पहले ही दिन गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर मुंबई ने अपनी पकड़ बना ली है.

75 साल में पहली बार फाइनल में पहुंचे सौराष्ट्र की पहली पारी 148 रनों पर समेटने के बाद मुंबई ने दिन की समाप्ति तक अपनी पहली पारी में बिना कोई विकेट गंवाए 19 रन बना लिए.

सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर 11 और कौस्तुभ पवार चार रन पर नाबाद लौटे. जाफर को रणजी इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाला खिलाड़ी बनने के लिए अब 72 रनों की जरूरत है.

मुंबई के पास बल्लेबाजी का भरपूर मौका है और साथ ही उसके पास 40वीं बार खिताब जीतने का भी स्वर्णिम मौका भी. इसके लिए उसे बस अपनी पहली पारी में 148 रनों का योग पार करना होगा और फिर अपने स्कोर को उस ऊंचाई तक ले जाना होगा, जहां से सौराष्ट्र के बल्लेबाज उसे पार पाने की हिम्मत न कर सकें. यह मौका मुंबई के पास है और मौजूदा फार्म को देखते हुए उसके लिए यह कर पाना मुश्किल नहीं.

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मुंबई के गेंदबाजों ने धवल कुलकर्णी (24/4) के नेतृत्व में शानदार काम किया और अपने कप्तान अजीत अगरकर के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के फैसले का सम्मान करते हुए सौराष्ट्र को 148 रनों पर आउट कर दिया.

पिच में मौजूद नमी का फायदा उठाकर मुंबई के गेंदबाजों ने भोजनकाल तक 50 रनों पर ही सौराष्ट्र के पांच विकेट झटक लिए थे लेकिन अर्पित वासावदा (55) और कमलेश मकवाना (26) के बीच छठे विकेट के लिए हुई 64 रनों की साझेदारी ने सौराष्ट्र को 100 रनों से कम पर आउट करने की उनकी मुहिम को नुकसान पहुंचाया.

वासावादा ने अपनी 146 गेंदों की पारी में नौ चौके लगाए जबकि मकवाना ने 83 गेंदों का सामना करते हुए चार चौके लगाए. इसके बाद जयदेव उनादकत ने भी 22 रनों की पारी खेली लेकिन इनके अलावा सौराष्ट्र का कोई और बल्लेबाज मुंबई के गेंदबाजों के अनुशासन के आगे नहीं टिक सका.

वासावादा 114 रन के कुल योग पर आउट हुए. मकवाना का विकेट 115, शौर्य शांडिल्य (4) का विकेट 141 और उनादकत का विकेट 142 रनों के कुल योग पर गिरा. अंतिम विकेट के रूप में सिद्धार्थ त्रिवेदी (2) आउट हुए. मैच के पहले सत्र में कुलकर्णी ने दो रन के कुल योग पर सौराष्ट्र के सलामी बल्लेबाज सागर जोगियानी को चलता कर दिया था. जोगियानी एक रन बना सके.

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शितांशु कोटक और राहुल दवे ने दूसरे विकेट के लिए 10 रन जोड़े. यह साझेदारी नवजात ही थी कि कुलकर्णी ने दवे (3) को आउट करके सौराष्ट्र को दूसरा झटका दिया. यह विकेट 12 के कुल योग पर गिरा.

इसके बाद विकेट पर वासावदा आए, जो भोजनकाल तक मुंबई के गेंदबाजों से लोहा लेते रहे लेकिन 36 रन के कुल योग पर सौराष्ट्र को कोटक (14) के रूप में तीसरा झटका लगा. यह विकेट दावोलकर को मिला.

कोटक के बाद वासावदा का साथ देने विकेट पर आए शेल्डन जैक्सन (5) ने सौराष्ट्र को फाइनल में पहुंचाने का तो काम कर दिया लेकिन वह इस अहम मुकाम पर अपनी भूमिका भूल गए. उनका विकेट 45 रन के कुल योग पर गिरा, जो कुलकर्णी को मिला.

कुल योग में पांच रन ही जुटे थे कि दावोलकर ने मेहमान टीम के कप्तान जयदेव शाह (0) को आउट करके अपनी टीम को एक शानदार तोहफा दिया. शाह सिर्फ छह गेंदों का सामना कर सके.

मुंबई की ओर से अभिषेक नायर और विशाल दावोलकर ने भी दो-दो सफलता हासिल की. एक विकेट कप्तान अगरकर के खाते में गया.

मुंबई की टीम 44वीं बार फाइनल में पहुंची है और 39 बार खिताब जीत चुकी है. सौराष्ट्र के लिए यह आंकड़ा किसी सपने की तरह है क्योंकि वह नए नाम के साथ खेलते हुए 75 साल के बाद फाइनल में पहुंची है.

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