
1973 में वेस्ट इंडीज़ की टीम इंग्लैण्ड में थी. पहला टेस्ट वेस्ट इंडीज़ के खाते में आया और दूसरा ड्रॉ रहा. तीसरा मैच लॉर्ड्स में 23 अगस्त को शुरू हुआ. रोहन कन्हाई की कप्तानी में टीम बल्लेबाज़ी करने उतरी और पहले दो दिनों में उन्होंने पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर दिया. इंग्लैण्ड पूरे 10 विकेट नहीं ले सकी. वेस्टइंडीज़ ने 8 विकेट पर 652 रन बना डाले. जवाब में दूसरे दिन जब इंग्लैण्ड बैटिंग करने उतरी तो उसने 88 रन पर 3 विकेट खो दिए. इंग्लैण्ड संकट में दिख रही थी. हर कोई मान चुका था कि वेस्ट इंडीज़ ये सीरीज़ 2-0 से जीतेगी.
वेस्ट इंडीज़ के इन 652 रनों में 150 रन गैरी सोबर्स के भी थे. गैरी सोबर्स मौज-मस्ती करने के लिये जाने जाते थे. पहले दिन का खेल ख़त्म हुआ तो वो 31 रनों पर नाबाद खेल रहे थे. शाम होते ही वो क्लाइव लॉयड के साथ डिनर के लिये बाहर निकल पड़े. खाना खाने के बाद क्लाइव तो होटल वापस आ गए लेकिन सोबर्स अपने दोस्त रेज स्कारलेट (पूर्व वेस्ट इंडीज़ स्पिनर) से मिले. ये दोनों वहां से निकले और एक नाइटक्लब पहुंच गए.
यहां दोनों ने गप्पे मारे और शराब पी. देर रात सोबर्स को अहसास हुआ कि अब उन्हें सोने की ज़रूरत नहीं थी. असल में, सोबर्स का ये मानना था कि उन्हें बहुत नींद की ज़रूरत नहीं होती थी, वो 4-5 घंटे की नींद के बाद बगैर समस्या के अपना काम कर सकते थे. लिहाज़ा, सोबर्स ने अपने दोस्त का हाथ थामा और उसे वापस अपने होटल ले आये. यहां उन्होंने सुबह 9 बजे तक शराब पी.

24 अगस्त की 9 बजे सोबर्स बार से उठे, अपने कमरे में गए, गरम पानी से नहाये, पैड पहने और बैटिंग करने चले गए. उनके सभी साथी खिलाड़ियों को मालूम था कि उनकी रात कैसी बीती थी. सोबर्स के सामने बॉब विलिस गेंद फेंकने के लिये खड़े थे. सोबर्स ख़ुद कहते हैं कि उन्हें बॉब विलिस के सिर्फ़ हाथ और पैर दिख रहे थे. पहली गेंद पर सोबर्स ने बल्ला घुमाया लेकिन गेंद काफ़ी दूर से निकली. मैदान पर वेस्ट इंडीज़ के कप्तान रोहन कन्हाई और बाक़ी खिलाड़ियों की हंसी सुनाई दे रही थी जो बालकनी में खड़े पूरा मंजर देख रहे थे.
अगली गेंद पर फिर सोबर्स ने बल्ला घुमाया. गेंद फिर दूर से निकल गयी. एक बार फिर सोबर्स को उनके साथियों की हंसी सुनाई दी. ओवर की पांच गेंदों पर यही होता रहा. सोबर्स एक भी गेंद पर बल्ला नहीं लगा पाये. छठी गेंद ने उनके बल्ले को स्पर्श किया और यहां से सोबर्स सीधे अपने शतक पर रुके.
लेकिन शतक तक आते-आते सोबर्स के सामने एक मुसीबत खड़ी हो रही थी. उनके पेट में ऐंठन हो रही थी. वो ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे. शराब की लम्बी पारी के बाद मैदान पर चल रही उनकी पारी की वजह से उनके शरीर में पानी की कमी हो रही थी और लॉर्ड्स की कड़क धूप बहुत साथ नहीं दे रही थी. वो मैच छोड़कर जाना चाहते थे लेकिन इतना अच्छा खेल रहे थे कि रुके रहना चाहते थे. अंततोगत्वा, जब उनसे नहीं रहा गया, वो चलकर चार्ली एलियट के पास पहुंचे. ड्रिंक्स ब्रेक लिया जा रहा था और उन्होंने चार्ली से कहा कि वो जा रहे थे. चार्ली ने कहा कि उन्हें चोट तो लगी नहीं थी, वो क्यूं जा रहे थे. सोबर्स ने जवाब दिया, "चार्ली, मैं 50 मिनट से ख़ुद को रोके हुए हूं. अब और नहीं रुक सकता. जो मर्ज़ी आये वो बोल देना. मैं चला..."
सोबर्स जैसे-तैसे पवेलियन पहुंचे जहां उन्होंने रोहन कन्हाई को पूरी बात बतायी. सोबर्स ने कहा कि उन्हें बस एक ही चीज़ राहत दे सकती थी - पोर्ट और ब्रांडी. कन्हाई सोबर्स को अच्छी तरह से जानते थे. उन्होंने तुरंत ही वो ड्रिंक मंगवायी. सोबर्स एक सांस में पूरी ड्रिंक गटक गए. कन्हाई ने फिर से आदेश दिया कि पोर्ट और ब्रांडी और लायी जाए, लेकिन इस बार एक बड़े गिलास में. सोबर्स ने वो भी ख़तम किया और आराम फरमाने लगे. इस बीच बर्नार्ड जूलियन और कीथ बॉयस ने मिलकर 76 रन बनाये. जूलियन के आउट होते ही सोबर्स फिर मैदान में उतरे और 150 रन पूरे किये. उनके 150 के स्कोर पर पहुंचते ही कप्तान कन्हाई ने पारी घोषित कर दी.