मैं भाग्य हूं जीवन में शांति की तलाश में इंसान क्या नहीं करता. पैसे कमाता है ताकि भौतिक सुखा का भोग कर सके. गृहस्थ जीवन में खुद झोंक देता है. ताकि वो अपने परिवार की सभी जरूरतों को पूरा कर सके. फिर वो बुढापे में शांति की तलाश में भटकता है. कभी किसी संत या गुरू की शरण में जाता है. तो कभी जंगलों में यहां वहां भटकता है. लेकिन जीवन में शांति का आनंद फिर नहीं मिल पाता.