सड़क नहीं तो वोट नहीं जैसी मांगे आपने खूब सुनी होगी लेकिन क्या कभी हेलिकॉप्टर नहीं तो वोट नहीं जैसी डिमांड सुनी है? जी हां मध्य प्रदेश के रीवा में ग्रामीणों ने चुनाव आयोग से वोटिंग करने के लिए हेलिकॉप्टर की मांग की है.
पंचायत चुनाव नजदीक आने के बाद एक बार फिर ग्राम पंचायतों में हलचल तेज हो गई है. चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रत्याशी वोटरों को अलग-अलग तरीकों से रिझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन रीवा जिले के गंगेव जनपद का मामला थोड़ा अलग है.
सेदहा ग्राम पंचायत में ग्रामीणों ने चुनाव के लिए हेलिकॉप्टर की मांग की है. रीवा जिले की एक ग्राम पंचायत ऐसी है जहां आजादी के 75 साल बाद भी सड़क नहीं बन पाई है. फिर भी जिला मुख्यालय में बैठे अधिकारियों ने बारिश के मौसम में हो रहे पंचायत चुनाव के लिए पंचायत में पोलिंग बूथ तय कर दिया है.
ऐसे में नेवरिया गांव के मतदाताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत कर हेलिकॉप्टर की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि अभी समय रहते मतदान केन्द्र बदल दिया जाए क्योंकि हल्की सी बारिश में ही गांव का संपर्क शहर से टूट जाता है जिसके बाद वोटिंग कराने वाली टीम भी पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच पाएगी और आम मतदाता वोट करने से वंचित हो जाएंगे.
ग्राम पंचायत सेदहा में 1328 मतदाता हैं जिसमें पुरुष वोटरों की संख्या 711 और महिला वोटर की संख्या 617 है. इस पंचायत में सेदहा गांव, नेवरिया गांव, नेवरिया लोहरा गांव, भमरिया गांव और बडिऔर गांव शामिल है.
आरोप है कि नेवरिया गांव बरसात के समय 3 से 4 महीने तक मुख्य मार्ग से कटा रहता है. जरूरी काम आने पर ग्रामीणों को खेत की मेड़ और नाला पार कर जाना पड़ता है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में जाने का रास्ता नहीं है. बारिश के समय सिर्फ हेलिकॉप्टर अथवा हवाई जहाज ही जा सकता है. हमारी निर्वाचन आयोग से मांग है कि यदि आप चाहते हैं कि सभी लोग मतदान करें तो हेलिकॉप्टर तैयार रखें.
सेदहा और भंवरिया के कुल मतदाताओं में 85 प्रतिशत से अधिक हरिजन और आदिवासी मतदाता हैं. सेदहा और भमरिया के कुल मतदाताओं की संख्या 409 है, वहीं नेवरिया गांव के अधिकतर मतदाता सामान्य वर्ग के हैं और उनकी संख्या 373 है.
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