रूमेटाइड अर्थराइटिस (गठिया का एक प्रकार) दुनिया भर में बुजुर्गों को ही नहीं बल्कि युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है. यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो अब पहले से कहीं ज्यादा लोगों में देखी जा रही है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि 1990 के बाद से रूमेटाइड अर्थराइटिस के मामलों में 13 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है. वहीं, एक नए अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 1.8 करोड़ से ज्यादा लोग इस ऑटोइम्यून बीमारी से प्रभावित हैं और विशेषज्ञों ने पाया कि ये बीमारी युवाओं में काफी देखी जा रही है.
रुमेटाइड गठिया क्या है?
यह एक क्रॉनिक कंडीशन है जो मरीजों में दर्द और सूजन का कारण बनती है. इसके अलावा यह शरीर के अन्य अंगों जैसे त्वचा, आंखें, फेफड़े, हृदय और ब्लड वेसल्स को भी नुकसान पहुंचा सकती है. यह एक एक ऑटोइम्यून डिसीस है जिसका मतलब है कि इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही शरीर के ऊतकों पर हमला करने लगती है.
'जर्नल एनल्स ऑफ द रूमेटिक डिजीज' में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जनसंख्या वृद्धि ने भारत, पाकिस्तान और स्पेन समेत अधिकांश देशों में इस बीमारी के बोझ को बढ़ाया है जबकि थाईलैंड, चीन और पोलैंड में लोगों की उम्र बढ़ने का इस पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा.
क्या कहती है रिसर्च
अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि लो-मिडल सोशियोडेमोग्राफिक इंडेक्स वाले क्षेत्रों में 2040 तक वृद्धावस्था और जनसंख्या वृद्धि के कारण इस बीमारी का बोझ बढ़ सकता है जबकि हाई-मिडल सोशियोडेमोग्राफिक इंडेक्स वाले क्षेत्रों में बोझ कम देखा जा सकता है.
लो-मिडल सोशियोडेमोग्राफिक इंडेक्स क्षेत्र यानी वो देश जहां विकास काफी कम है जहां प्रति व्यक्ति की आय और शिक्षा का स्तर कम है लेकिन प्रजनन दर ज्यादा है. इन देशों को ज्यादातर अच्छी हेल्थ फैसिलिटीज की कमी और बीमारी के बोझ समेत कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है
इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रमुख शोधकर्ता क्वेरन लिन के अनुसार, हालांकि पिछले ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीस (जीबीडी) अध्ययनों ने कई जरूरी चीजें बताई हैं लेकिन वो बड़े पैमाने पर वैश्विक और राष्ट्रीय पैमाने पर ज्यादा साफ तस्वीर पेश नहीं कर पाए हैं.
क्या होते हैं रुमेटाइड गठिया के लक्षण
मायो क्लिनिक के अनुसार, रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं.
1- इनमें सबसे ज्यादा लोगों को जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न महसूस होती है.
2- जोड़ों में अकड़न जो अक्सर सुबह और आराम करने के बाद ज्यादा होती है. यह 45 मिनट या उससे ज्यादा समय तक रह सकती है.
3- थकान, बुखार और खाने की इच्छा न होना भी इस बीमारी का एक कारण हो सकता है.
4- ये कंडीशन होने पर बहुत ज्यादा थकान हो सकती है, यहां तक कि भरपूर नींद लेने के बाद भी.
5-कुछ मामलों में मरीजों को हल्का बुखार भी आ सकता है.
रुमेटाइड गठिया के कारण
-रुमेटाइड अर्थराइटिस के रिस्क फैक्टर्स में व्यक्ति का लिंग भी अहम किरदार अदा करता है क्योंकि रिसर्च के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये बीमारी विकसित होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए महिलाओं को खासतौर पर इसका ध्यान रखना चाहिए.
-पेट के माइक्रोबायोम में बदलाव भी इस बीमारी के विकास में योगदान दे सकता है क्योंकि माइक्रोबायोम प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है.
-इसके अलावा उम्र, फैमिली हिस्ट्री, धूम्रपान की मात्रा, और ज्यादा वजन जैसी चीजें भी अहम किरदार अदा करती हैं.
-ऐसा माना जाता है कि हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव विशेष रूप से महिलाओं में, भी इस बीमारी को बढ़ाने का रिस्क बढ़ा सकते हैं लेकिन इसके सटीक मेकानिज्म का फिलहाल अध्ययन किया जा रहा है.
क्या है रुमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज
रुमेटाइड अर्थराइटिस गठिया का एक ऐसा प्रकार है जिसमें आपको तेज दर्द का अनुभव होता है और आपका चलना-फिरना और अपने रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है. अगर आपको रूमेटाइड गठिया के लक्षण नजर आएं तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. इसके लक्षण गंभीर होने से पहले और कंडीशन खराब होने से पहले अगर बीमारी का निदान हो जाता है तो ज्यादा बेहतर है.
ब्रिटेन की सरकारी हेल्थ एजेंसी NHS.UK के अनुसार, रूमेटाइड अर्थराइटिस का कोई इलाज नहीं है लेकिन शुरुआती ट्रीटमेंट्स (जिसमें दवा, जीवनशैली में बदलाव, सपोर्ट और सर्जरी शामिल है) जोड़ों के नुकसान के जोखिम को कम कर सकते हैं और कंडीशन को खराब होने से बचा सकते हैं. रुमेटीइड गठिया के ट्रीटमेंट में रोग की प्रगति को धीमा करना और जोड़ों के नुकसान को रोकना सबसे प्रभावी और जरूरी उपाय होता है.