फूलन देवी उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं. इसकी वजह अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाला विधानसभा चुनाव है. राजनीति दल फूलन देवी के बहाने निषाद समाज के बीच अपनी पकड़ बनाना चाहते हैं. वो फूलन देवी के नाम और उनकी विरासत को अपना सहारा बना रहे हैं. इस बार पहले के मुकाबले मुकाबले फूलन देवी को कहीं ज्यादा जोरशोर से मंगलवार को उनकी 58वीं जयंती पर याद किया गया. उत्तर प्रदेश की 50 फीसदी से अधिक पिछड़ी आबादी में तकरीबन 5 फीसद निषाद हैं जो अति पिछड़ी उपजातियों में माने जाते हैं. मोटे तौर पर देखें तो निषादों में 150 से ज्यादा उप जातियां हैं और पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में इनकी अच्छी-खासी तादाद है. इसपर ज्यादा जानकारी दे रहे हैं आजतक संवाददाता कुमार अभिषेक.