उत्तर प्रदेश के दो शहरों में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया है. अब लगभग 40 लाख की आबादी वाले लखनऊ और 25 लाख की आबादी वाले नोएडा शहर में पुलिस कमिश्नर की तैनाती कर दी गई है. दोनों ही शहरों की पुलिस विभाग की कमान अब SSP की बजाए पुलिस कमिश्नर के हाथों में होगी.
योगी सरकार ने आलोक सिंह को नोएडा का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है. तो सुजीत पांडेय लखनऊ के पहले पुलिस कमिश्नर बने हैं. यूपी सरकार से आईपीएस अफसरों की ये बहुत पुरानी मांग थी. आईपीएस लॉबी का दावा है कि नई व्यवस्था के तहत पुलिस कमिश्नर सामान्य प्रशासन के नियंत्रण से मुक्त रहते हैं. इस व्यवस्था के साथ ही पुलिस अफसरों का नया वरिष्ठता क्रम तैयार हुआ है.
पुलिस कमिश्नर होंगे चीफ
पुलिस कमिश्नर प्रणाली में एक पुलिस आयुक्त होगा, कमिश्नर एडीजी रैंक के अधिकारी होंगे. इसके नीचे ज्वाइंट सीपी की नियुक्ति होगी, जो IG रैंक के अधिकारी होंगे. फिर एडिशनल कमिश्नर होगा जो डीआईजी रैंक का IPS होगा. इसके आगे डीसीपी होंगे जो मौजूदा SSP रैंक के अधिकारी के सामान होंगे. इसके नीचे एसीपी होंगे जो मौजूदा एसपी रैंक के होंगे. इसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर-एसएचओ और पुलिस दल होगा.
अब पुलिस देगी होटल और बार के लाइसेंस
नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर के अधिकारों में जबर्दस्त इजाफा हुआ है. कानून-व्यवस्था से जुड़े जो अधिकार पहले डीएम के पास होते थे वो भी अब पुलिस कमिश्नर के पास होंगे. मसलन तमाम SHO की तैनाती का अधिकार. पुलिस के पास अब धारा 144 लागू करने का भी अधिकार होगा. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दूसरे तमाम फैसले भी अब पुलिस ले सकेगी.
नयी व्यवस्था में होटल के लाइसेंस, बार के लाइसेंस, हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी कमिश्नर को मिल जाएगा. धरना प्रदर्शन की अनुमति देना या ना देना, दंगे के दौरान लाठी चार्ज होगा या नहीं, कितना बल प्रयोग होगा यह भी पुलिस ही तय करेगी.