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लखनऊः मां की दी किडनी से जीते मेडल, लेकिन आर्थिक तंगी ने तोड़ दी कमर

युवा एथलीट राम हरक यादव को बहुत पहले पीलिया हो गया था. उन्हें लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया तो डॉक्टरों ने बताया कि उनकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं. तब उसकी मां ने अपनी एक किडनी उसे दे दी और वह उसी के सहारे जिंदा है.

राम हरक यादव ने एक किडनी के सहारे नेशनल स्तर पर जीता था रजत पदक राम हरक यादव ने एक किडनी के सहारे नेशनल स्तर पर जीता था रजत पदक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पीलिया की वजह से दोनों किडनी हो गई थी खराब
  • मां ने एक किडनी देकर बेटे की बचाई थी जान
  • मुंबई में इस साल नेशनल गेम्स में जीता रजत पदक
  • कोरोना की वजह से एशियाई गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके

राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित मिनी स्टेडियम में एक ऐसा एथलीट भी है जो अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी मां द्वारा दी गई एक किडनी के दम पर रोजाना सुबह-शाम अभ्यास करता है और दौड़ लगाता है. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और परिजन कर्ज के तले दबे हुए हैं लेकिन उसका लक्ष्य है कि अपने खेल के जरिए वह देश का नाम रोशन करे.

दरअसल, युवा एथलीट राम हरक यादव को बहुत पहले पीलिया हो गया था. उन्हें लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया तो डॉक्टरों ने बताया कि उनकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं. तब उसकी मां ने अपनी एक किडनी उसे दे दी और वह उसी के सहारे जिंदा है. एथलीट के पिता घर पर ही रहते हैं क्योंकि जब वह छोटे थे तभी उनके पिता के आंत का ऑपरेशन हुआ था.

एथलीट राम हरक यादव की आर्थिक तंगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें दौड़ने के लिए दूसरों से रनिंग स्पोर्ट्स शूज मांगने पड़ते हैं. उन्होंने आजतक से बताया कि उनके परिवार के ऊपर साढ़े तीन लाख का कर्ज है. 13 लाख रुपये मेरे किडनी ट्रांसप्लांट में लग गए, हालांकि उसमें सरकार ने भी मदद की थी. किडनी ट्रांसप्लांट हुए 6 साल हो गए हैं. 

नेशनल गेम्स में जीता रजत पदक 
इसी साल मुंबई में हुए 12वीं नेशनल किडनी ट्रांसप्लांट गेम्स में राम हरक यादव ने 100 मीटर की रेस में हिस्सा लिया और रजत पदक जीता. किडनी ट्रांसप्लांट गेम्स के लिए कई लोगों ने उनकी मदद की थी. यहां तक जूते से लेकर टिकट तक सब की व्यवस्था उनके करीबियों ने ही की थी.

मुंबई में नेशनल गेम्स में जीता था रजत पदक
मुंबई में नेशनल गेम्स में जीता था रजत पदक

उन्होंने कहा कि जब वह दौड़ में सिल्वर मेडल जीते, तब उदास हो गए थे कि जिन लोगों से पैसा लेकर जूता और टिकट लेकर यहां तक आया. अब उन्हें क्या मुंह दिखाऊंगा? लेकिन जब माइक के जरिए यह अनाउंस किया गया की वह जिस एथलीट से हारे हैं, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक खिलाड़ी है और वह खुद उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा एथलीट है, जिसने रेस में रजत पदक हासिल किया है.

राष्ट्रीय टीम में चयन
राम हरक यादव कहते हैं कि यह सुनने के बाद उनमें थोड़ा हौंसला आया और वो खुश हुए. जीत के बाद यह सिलसिला यहीं पर नहीं रुका, उनका चयन राष्ट्रीय टीम में हो गया. एशियाई लेवल पर थाइलैंड में होने वाले ऑर्गन ट्रांसप्लांट कैटेगरी गेम्स में हिस्सा लेने के लिए उन्हें थाइलैंड जाना था.

ऑर्गन ट्रांसप्लांट गेम्स में उनका चयन दौड़ और बैडमिंटन चैंपियनशिप में हुआ था. उन्होंने जाने की व्यवस्था भी लोगों के मदद से कर्ज लेकर कर ली थी, लेकिन कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन हो गया और वह देश के बाहर नहीं जा पाए. बाद में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गेम्स भी रद्द कर दिए गए.

आर्थिक संकट से जूझ रहा परिवार
राम हरक ने आर्थिक तंगी के बारे में आजतक से कहा कि मेरा और मेरे परिवार का गुजारा बहुत मुश्किल से हो पा रहा है. आर्थिक तंगी की वजह से मैं गोमती नगर के मिनी स्टेडियम में संविदा पर चपरासी का काम करता हूं जिसके बदले में मुझे 5 हजार रुपये मिल जाते हैं, लेकिन वह 5 हजार रुपये सिर्फ उनकी दवाई में ही खर्च हो जाते हैं.

उन्होंने बताया कि घर में दो बहन भी हैं जिनकी शादी अभी करनी है. मेरी मां के पास भी एक किडनी है क्योंकि उन्होंने मुझे अपनी किडनी दे दी है. पिताजी की भी तबीयत खराब रहती है, जब मैं छोटा था तब मेरे पिताजी की आंतों का ऑपरेशन हुआ था. जिसके कारण वह घर पर ही रहते हैं.

उन्होंने बताया कि घर की हालत खराब होने के चलते उनका छोटा भाई जो पढ़ रहा था, अब वह माली का काम करने लगा है, ताकि दो पैसे घर में आ सकें.

सरकार करे मददः कोच
मिनी स्टेडियम में आने वाले एक सदस्य नवीन प्रकाश सिंह जो एथलीट राम हरक यादव के आर्थिक मददगार भी हैं और उन्हें फिटनेस तथा खेल के गुर सीखाते हैं. वह बताते हैं कि जिसके पास सिर्फ एक किडनी हो और उसके बावजूद भी वह प्रदेश का नाम रोशन करे, यह बड़ी बात है.

वह कहते हैं कि मुझसे जो हो पाता है, मैं राम हरक की मदद कर दिया करता हूं. सरकार को भी उनकी मदद करनी चाहिए ताकि वह लोगों के लिए मिसाल बन सकें.

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