उत्तर प्रदेश के एटा संसदीय क्षेत्र में रोमांचक मुकाबला देखा गया. इस सीट पर 62.64 फीसदी वोटर्स ने वोट डाला. यहां पर 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 58.43 फीसदी मतदान हुआ था. हालांकि मंगलवार को उत्तर प्रदेश में कुल 61.35 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इस सीट पर 14 उम्मीदवार अपना राजनीतिक किस्मत आजमा रहे हैं.
लोकसभा चुनाव अपडेट्स
- एटा लोकसभा सीट पर मतदाताओं का खासा उत्साह दिखा. यहां शाम 5 बजे तक 59.90 फीसदी मतदान हुआ. दूसरी ओर तीसरे चरण में 117 संसदीय सीटों पर 61.31 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. उत्तर प्रदेश में 10 संसदीय सीटों पर औसतन 60.52 फीसदी मतदान हुआ. 5 बजे तक हुई पश्चिम बंगाल में 78.94 फीसदी वोटिंग हुई. यह अंतिम आंकड़ा नहीं है और इसमें बदलाव हो सकता है. 4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेशों में 70 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े.
- 3 बजे तक एटा में 49.46 फीसदी मतदान हो चुका है. वहीं देश में तीसरे चरण में कराए जा रहे मतदान में 117 संसदीय सीटों पर अब तक 51.15 फीसदी मतदान हो चुका है. उत्तर प्रदेश में मतदान पर नजर डाली जाए तो यहां पर प्रदेश के 10 संसदीय सीटों पर 3 बजे तक 46.99 फीसदी मतदान हो चुका है. इस समय तक सबसे ज्यादा मतदान पश्चिम बंगाल में हुआ जहां 67.52 फीसदी वोटिंग हुई.
Estimated voter turnout till now for the 3rd phase of the #LokSabhaElections2019 is 51.15%. Voting for 116 parliamentary constituencies across 13 states and 2 union territories is being held today. pic.twitter.com/mV9g0JmSq1
— ANI (@ANI) April 23, 2019
1 बजे तक राज्यों में हुए मतदान का प्रतिशत
- दोपहर 1 बजे तक एटा में 36.50 फीसदी मतदान हो चुका है. वहीं देश में तीसरे चरण में कराए जा रहे मतदान में 117 संसदीय सीटों पर अब तक 37.89 फीसदी मतदान हो चुका है.
-सुबह 11 बजे तक एटा में 23.00 फीसदी मतदान हो चुका है. तीसरे चरण के तहत आज मंगलवार को 10 संसदीय क्षेत्रों में अब तक 22.64% मतदान हो चुका है.
-सुबह 9 बजे तक एटा में 10.20 फीसदी मतदान हो चुका है.
महान सूफी संत अमीर खुसरो की जन्मभूमि एटा को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जाता है. एटा संसदीय सीट उत्तर प्रदेश के चर्चित लोकसभा सीटों में शुमार की जाती है और पिछली बार की तरह इस बार भी इस सीट पर सभी की नजर रहेगी क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह मैदान में हैं और उन पर चुनाव में जीत हासिल करने का दबाव है जबकि उनके खिलाफ इस बार सपा-बसपा की जोड़ी है.
एटा संसदीय सीट पर 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिसमें मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राजवीर सिंह उर्फ राजू भईया और समाजवादी पार्टी के देवेंद्र सिंह यादव के बीच है. इस सीट पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है. कांग्रेस ने यूपी में 3 क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर रखा है. इसी गठबंधन के तहत कांग्रेस ने यह सीट राष्ट्रीय जन अधिकार पार्टी (आरजेएपी) के लिए छोड़ी है और आरजेएपी ने सूरज सिंह को मैदान में उतारा है. 8 कई क्षेत्रीय दलों के अलावा और 5 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
कानपुर और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सटे एटा में पहला चुनाव (1952) कांग्रेस ने जीता था, लेकिन उसके बाद यहां से हिंदू महासभा ने पहले 1957 फिर 1962 में जीत दर्ज की. हालांकि, उसके बाद कांग्रेस ने 1967 और 1971 का आम चुनाव जीतकर जोरदार वापसी की. 1977 में चली कांग्रेस विरोधी लहर में चौधरी चरण सिंह की भारतीय लोकदल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 1980 के चुनाव में यहां से कांग्रेस ने आखिरी बार जीत हासिल की थी.
1984 में भारतीय लोक दल के जीत दर्ज करने के बाद यह सीट भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में आ गई. 1989, 1991, 1996 और 1998 में यहां भारतीय जनता पार्टी के महकदीप सिंह शाक्य ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 1999 और 2004 एटा से लगातार दो बार समाजवादी पार्टी का परचम लहराया.
2009 के लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने भारतीय जनता पार्टी से अलग हो अपनी पार्टी बनाई और चुनाव में जीत भी हासिल की. 2014 के चुनाव में कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह को टिकट मिला और उन्होंने बड़ी जीत हासिल की.
2014 का जनादेश
जातीय समीकरण के लिहाज से देखा जाए तो एटा संसदीय क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है. एटा क्षेत्र में लोध, यादव और शाक्य बहुल जातियां रहती हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर करीब 16 लाख मतदाता थे, जिसमें से 8.5 लाख पुरुष और 7.2 लाख महिला मतदाता हैं. एटा लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें कासगंज, अमॉपुर, पटियाली, एटा और मारहरा विधानसभा सीटें शामिल हैं.
2014 में देश में चली मोदी लहर का फायदा एटा में भी मिला और भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी को सीधे तौर पर करारी मात दी. एटा में हुए 58 फीसदी मतदान में बीजेपी के राजवीर सिंह को करीब 51 फीसदी वोट मिले तो उनके प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को सिर्फ 29 फीसदी वोट मिले थे.
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