रुचिका को इंसाफ दिलाने के लिए उसके पिता फिर से कोर्ट जाएंगे और एसपीएस राठौड़ पर धारा 306 लगाने की अपील करेंगे. ये धारा खुदकुशी के लिए उकसाने से जुड़ा है. इसके तहत राठौड़ को 10 साल तक की कैद हो सकती है. साथ-साथ उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
रुचिका के पिता एस सी गिरहोत्रा ने इस मामले में सीबीआई की नीयत पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सीबीआई ने राठौड़ पर धारा 306 नहीं लगाकर उनकी मदद की थी. गिरहोत्रा ने जांच रिपोर्ट में उनकी पत्नी के रूप में वीणा नाम की महिला का नाम लिखे जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वीणा का मेरे परिवार से कोई रिश्ता नहीं है. गिरहोत्रा के मुताबिक जब जांच रिपोर्ट बनाई जा रही थी तो वो वहां मौजूद नहीं थे.
दूसरी ओर रुचिका को इंसाफ दिलाने के लिए मामले की पैरवी कर रहे वकील पंकज भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि एसपीएस राठौड़ ने हर रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की. पंकज के मुताबिक अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भरोसा करें तो उसने खुदकुशी नहीं की थी. लेकिन रुचिका की ही मेडिकल रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा गया है कि कीटनाशक खाने की वजह से उसकी मौत हुई. अब सवाल उठता है कि रिपोर्ट में ये बदलाव कैसे आया. जाहिर है रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की गई.
इतना ही नहीं, रुचिका के परिवार पर इस गलत रिपोर्ट को साइन करने के लिए भी राठौड़ ने दबाव डाला. पंकज ने राठौड़ पर जांच रिपोर्ट में भी छेड़छाड़ का आरोप लगाया है. उधर राठौड़ के वकील अजय जैन का कहना है कि रुचिका की खुदकुशी के बाद उनके माता-पिता ने ही पुलिस में ये बयान दिया था कि उनकी बेटी मोटापा घटाने की दवा लेती थी.