तीन तलाक बिल मंगलवार को राज्यसभा से पास हो गया. बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में 84 वोट पड़े. लोकसभा से यह बिल 26 जुलाई को ही पास हो चुका था. ऐसे में अब तीन तलाक देने को कानूनी अपराध माना जाएगा. राज्यसभा में बिल पास होने से पहले जमकर तीखी बहस चली. इस दौरान बिल का विरोध करने वालों पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तंज कसा. उन्होंने कहा कि दहेज मांगने पर पति को जेल, लेकिन तीन तलाक पर जेल भेजने में ऐतराज क्यों है?
उन्होंने कहा कि पैगम्बर साहब ने हजारों साल पहले इसे गलत बता दिया था, लेकिन हम इस पर 2019 में बहस कर रहे हैं. विपक्ष के लोग 'लेकिन' के साथ तीन तलाक को गलत बता रहे हैं क्योंकि ये लोग इसे चलने देना चाहते हैं. प्रसाद ने कहा कि गुलाब नबी आजाद अपनी पार्टी के अच्छे काम भी भूल गए. उन्होंने कहा कि दहेज कानून को गैर जमानती बनाया तब किसी के जेल जाने की चिंता क्यों नहीं हुई. आपकी ओर से प्रगतिशील कानून लाए गए, उनका विरोध नहीं हुआ, लेकिन शाहबानो के मामले में कांग्रेस के पैर क्यों हिलने लगते हैं, इसका जवाब गुलाम नबी आजाद को देना चाहिए.
रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि कानून के बिना पुलिस पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनने के लिए तैयार नहीं थी. मुस्लिम समाज की बेटियों के लिए न्याय पर ही सवाल क्यों उठते हैं, यही सवाल 1986 में उठे थे, जिसके बाद कांग्रेस कभी बहुमत में नहीं आ पाई. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने देश हित में बगैर डरे फैसले लिए और चुनाव में हार-जीत के बारे में कभी नहीं सोचा. प्रसाद ने कहा कि हम आतंकवाद से लड़ने वाले लोग हैं.
वहीं, गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम महिला सशक्तिकरण के हक में हैं और हम भी बिल को कुछ बदलाव के साथ पारित कराना चाहते थे. उन्होंने कहा कि हम इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजना चाहते थे लेकिन सत्ताधारी पार्टी ने इसे खारिज कर दिया.