नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार से आजतक पर जब पूछा गया कि एमएमएमई को मिले इस पैकेज से इकोनॉमी की तस्वीर कैसे बदलेगी तो उन्होंने कहा कि अब 200 करोड़ रुपये तक के टेंडर ग्लोबल टेंडर नहीं रहेंगे, इससे एमएसएमई को इसमें भाग लेने का मौका मिलेगा.
उन्होंने कहा कि एमएसएमई का दायरा बढ़ गया है, अब 100 करोड़ तक की कंपनियां भी एमएसएमई ही मानी जाएगी, इससे इन कंपनियों की क्षमता बढ़ेगी ग्लोबल सप्लाई चेन में इनकी भागीदारी बढ़ेगी, ये छोटी कंपनियां ना सिर्फ ज्यादा प्रोडक्शन कर पाएंगे बल्कि ज्यादा पूंजी की वजह से अपने लिए जरूरत का बाजार भी ढूंढ़ पाएंगे. इससे इनकी क्षमता बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएसएमई को लेकर जो घोषणाएं की है इसका लाभ इन कंपनियों को 45 दिनों में मिलना शुरू हो जाएगा.
वर्किंग कैपिटल में इजाफा होगा
एमएसएमई को मिलने वाले 3 लाख करोड़ कर्ज का फायदा बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे इनकी वर्किंग कैपिटल में इजाफा होगा, नगदी की कमी से जूझ रही ये कंपनियां अपने कामगारों को मजदूरी दे पाएंगी और आखिरकार इससे इनके वित्तीय सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा.
सीधे पैसा बांट देंगे तो गंगा में बह जाएगावित्त मंत्री के MSME पर की गई घोषणा से खुश हैं नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कपूर और उनका मानना है कि इससे उन्हें मदद मिलेगी#हल्ला_बोल | @anjanaomkashyap और @sardanarohit के साथ लाइव https://t.co/fOz5QPkk43 pic.twitter.com/IPqaGG1FxG
— AajTak (@aajtak) May 13, 2020
राजीव कुमार ने इन आलोचनाओं को खारिज किया कि राहत पैकेज की आड़ में सरकार लोन योजना ला रही है. उन्होंने कहा, "अगर आप सीधे पैसा बांट देते हैं तो फिर उस पैसे की उत्पादकता लगभग शून्य हो जाती है. ये व्यावहारिक जोखिम हो जाता है. लोग पैसा लेकर भाग भी जाते हैं. लोन देने में ये होता है कि ऋण लेने वाले का भी कुछ स्वार्थ होता है जिससे कि वो भी उस पैसे का कुछ फायदा उठा पाए. एक बार पैसा बांट देंगे तो वो गंगाजी में बह जाएगा."
होटल और हॉस्पिटालिटी सेक्टर को मिल सकती है राहत
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा है कि आने वाले दिनों में सरकार उन सेक्टर के लिए कुछ ऐलान कर सकती है, जिनकी आय पूरी ठप हो गई है, जैसे होटल और हॉस्पिटालिटी सेक्टर. इसके अलावा सरकार के अगले ऐलान में रेहड़ी मजदूर, प्रवासी मजदूर, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को भी सरकार सौगात दे सकती है.