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MSME को पैसा देने पर नीति आयोग की राय, 45 दिनों में कंपनियों को मिलने लगेगा लाभ

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने इन आलोचनाओं को खारिज किया कि राहत पैकेज की आड़ में सरकार लोन योजना ला रही है. उन्होंने कहा कि अगर आप सीधे पैसा बांट देते हैं तो फिर उस पैसे की उत्पादकता लगभग शून्य हो जाती है. ये व्यावहारिक जोखिम हो जाता है. लोग पैसा लेकर भाग भी जाते हैं.

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नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार (बाएं)
नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार (बाएं)

  • ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ेगी MSME की भूमिका
  • सीधे पैसा देना व्यावहारिक जोखिम-राजीव कुमार
  • होटल, हॉस्पिटलिटी सेक्टर पर सरकार की नजर
प्रधानमंत्री के आर्थिक पैकेज पर नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि एमएसएमई (छोटे उद्योगों) में जान फूंकने के लिए ये बहुत बड़ा कदम है. छोटे और मंझोले उद्योग नगदी की कमी से जूझ रहे थे, सरकार ने ध्यान रखा है कि ये उद्योग दिवालिया ना हो जाएं. उन्होंने कहा कि बुधवार को वित्त मंत्री की घोषणा के बाद एमएसएमई अपने संकट से उबरेंगे और लाखों मजदूरों को रोजगार मिलेगा.

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार से आजतक पर जब पूछा गया कि एमएमएमई को मिले इस पैकेज से इकोनॉमी की तस्वीर कैसे बदलेगी तो उन्होंने कहा कि अब 200 करोड़ रुपये तक के टेंडर ग्लोबल टेंडर नहीं रहेंगे, इससे एमएसएमई को इसमें भाग लेने का मौका मिलेगा.

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उन्होंने कहा कि एमएसएमई का दायरा बढ़ गया है, अब 100 करोड़ तक की कंपनियां भी एमएसएमई ही मानी जाएगी, इससे इन कंपनियों की क्षमता बढ़ेगी ग्लोबल सप्लाई चेन में इनकी भागीदारी बढ़ेगी, ये छोटी कंपनियां ना सिर्फ ज्यादा प्रोडक्शन कर पाएंगे बल्कि ज्यादा पूंजी की वजह से अपने लिए जरूरत का बाजार भी ढूंढ़ पाएंगे. इससे इनकी क्षमता बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएसएमई को लेकर जो घोषणाएं की है इसका लाभ इन कंपनियों को 45 दिनों में मिलना शुरू हो जाएगा.

वर्किंग कैपिटल में इजाफा होगा

एमएसएमई को मिलने वाले 3 लाख करोड़ कर्ज का फायदा बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे इनकी वर्किंग कैपिटल में इजाफा होगा, नगदी की कमी से जूझ रही ये कंपनियां अपने कामगारों को मजदूरी दे पाएंगी और आखिरकार इससे इनके वित्तीय सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा.

सीधे पैसा बांट देंगे तो गंगा में बह जाएगा

राजीव कुमार ने इन आलोचनाओं को खारिज किया कि राहत पैकेज की आड़ में सरकार लोन योजना ला रही है. उन्होंने कहा, "अगर आप सीधे पैसा बांट देते हैं तो फिर उस पैसे की उत्पादकता लगभग शून्य हो जाती है. ये व्यावहारिक जोखिम हो जाता है. लोग पैसा लेकर भाग भी जाते हैं. लोन देने में ये होता है कि ऋण लेने वाले का भी कुछ स्वार्थ होता है जिससे कि वो भी उस पैसे का कुछ फायदा उठा पाए. एक बार पैसा बांट देंगे तो वो गंगाजी में बह जाएगा."

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होटल और हॉस्पिटालिटी सेक्टर को मिल सकती है राहत

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा है कि आने वाले दिनों में सरकार उन सेक्टर के लिए कुछ ऐलान कर सकती है, जिनकी आय पूरी ठप हो गई है, जैसे होटल और हॉस्पिटालिटी सेक्टर. इसके अलावा सरकार के अगले ऐलान में रेहड़ी मजदूर, प्रवासी मजदूर, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को भी सरकार सौगात दे सकती है.

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