2016 का वर्ष देश में कुछ बड़े हादसों और आपदाओं का साल रहा. इस दौरान देश में कई रेल हादसे, सड़क हादसे और प्राकृतिक आपदाएं आई जिससे देश को काफी नुकसान पहुंचा. आइए नजर डालते हैं 2016 के कुछ बड़े हादसे और आपदाओं पर:
भूकंप के झटकों से कांपे पूर्वोत्तर के राज्य
2016 के शुरुआत में ही पूर्वोत्तर से दर्दनाक खबर आई थी जिसमें 3 जनवरी को असम, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल, बिहार, झारखंड सहित कई इलाको में
झटके महसूस किए गए थे. भूकंप का केंद्र इंफाल से 33 किमी दूर और गहराई 35 किमी नीचे मापी गई थी. इस भूकंप में कुल 11 लोगों की मौत हो
गई थी, जबकि 200 से ज्यादा घायल हुए थे.
सियाचिन में बर्फीले तूफान की चपेट में आए JCO समेत सभी 10 सैनिकों की मौत
3 फरवरी को सियाचिन में हिमस्खलन की चपेट में आने से करीब 10 जवानों की मौत हो गई थी. इनमें एक जूनियर कमीशंड अधिकारी और मद्रास
बटालियन के 9 जवान शामिल थे. बचाव के लिए सेना और वायुसेना की टीम संयुक्त अभियान चला रही थी. हादसे के एक सप्ताह बाद बर्फ की 35
फीट नीची चादर से लांसनायक हनमन्नथप्पा जीवित बाहर निकले थे, हालांकि 11 फरवरी को इलाज के दौरान ही हनमनथप्पा की मृत्यु हो गई थी.
गुजरात : नदी में बस गिरने से हुआ भयंकर हादसा, 42 यात्रियों की मौत
दक्षिण गुजरात के नवसारी जिले में 5 फरवरी को गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस पुल से नीचे पूर्णा नदी में गिर गई थी जिसमें हादसे
में 42 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 27 लोगों घायल हुए, बस के अंदर कुल 60 लोग सवार थे.
कोलकाता में फ्लाईओवर गिरने से 27 लोगों की मौत
31 मार्च को कोलकाता में निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाईओवर के गिरने से 27 लोगों की मौत हो गई थी जबकि हादसे में 90 लोग घायल हुए थे.
लापरवाही बरतने पर चार अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई थी. हादसे को लेकर देश में कई दिनों तक राजनीति गर्म रही थी.
केरल: पुत्तिंगल मंदिर में आग से 111 लोगों की मौत, 350 से अधिक लोग घायल
10 अप्रैल को नवरात्र के दौरान रात में केरल के पुत्तिंगल मंदिर में आग लगने से 111 लोगों की मौत हो गई थी वहीं हादसे में 383 से ज्यादा लोग के
घायल हुए थे. हादसे के बाद नौसेना, वायुसेना समेत अन्य राहत एजेंसियों ने युद्ध स्तर पर बचाव कार्य किया. हादसे के बाद पीएम मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष
समेत अन्य नेताओं स्थानीय अस्पताल पहुंच लोगों का हालचाल जाना था.
उत्तराखंड के जंगलों पर आग का कब्जा, 3500 हेक्टेयर जंगल तबाह
अप्रैल, मई में उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग में 3500 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल तबाह हो गए. वहीं इसमें 7 से अधिक लोगों की मौत हुई. गर्मी के कारण लगी आग को बुझाने में वायु सेना का हेलीकॉप्टर ने ऊपर से कई दिनों तक पानी बरसाया, आग पर जल्द काबू नहीं पाया सका
जिसके कारण कई दिनों तक आग फैली रही.
असम में बाढ़ का भयंकर प्रकोप, काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य भी क्षतिग्रस्त
17 जुलाई को असम में आई भयंकर बाढ़ में कुल 34 लोगों की मौत हो गई थी, बाढ़ के कारण लोगों के घरों में पानी घुस गया था जिसकी वजह से बड़ी
संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था. काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य में बाढ़ के कारण 20 गैंडों सहित 207 जानवरों के मरने की खबर थी वहीं
वन विभाग ने 109 जानवरों को सुरक्षित बचाया, अभयारण्य का 80 फीसद हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया था.
बिहार में जहरीली शराब से 16 लोगों की मौत
बिहार के गोपालगंज में 16 अगस्त को जहरीली शराब पीने की वजह से 16 लोगों की मौत हो गई थी. 16 में से 10 लोगों की मौत गंभीर परिस्थितियों
में हुई वहीं बाकी लोगों ने इलाज के दौरान अपना दम तोड़ा. उल्लेखनीय है कि बिहार में अप्रैल महीने से सभी प्रकार की शराब बिक्री और इसके सेवन पर
प्रतिबंध लगा दिया गया है.
दिल्ली की जानलेवा धुंध
दिवाली के बाद से ही नवंबर के पहले सप्ताह राजधानी में जानलेवा धुंध का कहर रहा, इस दौरान 1 नवंबर से 9 नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर में हवा की
क्वालिटी काफी कम रही. वहीं हवा में PM 2.5 और PM 10 की मात्रा अधिकतम स्तर पर रही. दिल्ली में PM 2.5 की मात्रा अधिकतम 999
दर्ज की गई जबकि इसकी सामान्यतः मात्रा 60 माइक्रोग्राम तक होनी चाहिए, वहीं PM 10 ने भी 999 का आंकड़ा दर्ज छुआ था वहीं इसकी सामान्यतः
मात्रा 100 तक रहती है.
पुखरायां में दर्दनाक रेल हादसे में 150 लोगों की मौत
20 नवंबर को इंदौर से पटना जा रही इंदौर-पटना एक्सप्रेस के कानपुर के पास पुखरायां में पटरी से उतरने के कारण 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. हादसे के दौरान
रेलगाड़ी के 14 कोच पटरी से उतर गए थे. माना गया कि यह हादसा पिछले 17 सालों में सबसे भीषण रेल हादसा है. हादसे के बाद पांच रेल अधिकारियों
को निलंबित किया गया. हादसे में घायल और मृत लोगों को प्रधानमंत्री, रेल मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश सरकार और बिहार सरकार की
तरफ से मुआवजा दिया गया.
तमिलनाडु और आंध्र में 'वरदा' का कहर
12 दिसंबर को तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान 'वरदा' लगभग 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही थी. पिछले दो दशकों में
तमिलनाडु की राजधानी को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले चक्रवाती तूफान ‘वरदा' के कारण 10 लोगों की जान चली गयी थी, इससे घर तबाह हो
गये, टेलीफोन लाइनें टूट गयीं और रेल, सडक तथा वायु यातायात अवरुद्ध हो गया.