अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश-दुनिया के लोगों को संबोधित किया. प्रधानमंत्री ने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का ये दिन एकजुटता का दिन है. ये विश्व बंधुत्व के संदेश का दिन है. आइए जानें पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें.
1-जो हमें जोड़े, साथ लाए वही योग है. जो दूरियों को खत्म करे, वही योग है. कोरोना के इस संकट के दौरान दुनिया भर के लोगों का My Life - My Yoga वीडियो ब्लॉगिंग कंपटीशन में हिस्सा लेना, दिखाता है कि योग के प्रति उत्साह कितना बढ़ रहा है.
2-बच्चे, बड़े, युवा, परिवार के बुजुर्ग, सभी जब एक साथ योग के माध्यम से जुड़ते हैं, तो पूरे घर में एक ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए, इस बार का योग दिवस, भावनात्मक योग का भी दिन है, हमारी Family Bonding को भी बढ़ाने का दिन है.
3-स्वामी विवेकानंद कहते थे- “एक आदर्श व्यक्ति वो है जो नितांत निर्जन में भी क्रियाशील रहता है, और अत्यधिक गतिशीलता में भी सम्पूर्ण शांति का अनुभव करता है.” किसी भी व्यक्ति के लिए ये एक बहुत बड़ी क्षमता होती है.
4-योग का अर्थ ही है- ‘समत्वम् योग उच्यते’. अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है.
5-गीता में भगवान कृष्ण ने योग की व्याख्या करते हुए कहा है-‘योगः कर्मसु कौशलम्’. अर्थात्, कर्म की कुशलता ही योग है.
6-हमारे यहां कहा गया है-
युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।
युक्त स्वप्ना-व-बोधस्य, योगो भवति दु:खहा।।
अर्थात्,
सही खान-पान, सही ढंग से खेल-कूद, सोने-जागने की सही आदतें, और अपने काम, अपनी ड्यूटीज को सही ढंग से करना ही योग है.
7-एक सजग नागरिक के रूप में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे. हम प्रयास करेंगे कि Yoga at home and Yoga with family को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं. हम ज़रूर सफल होंगे, हम ज़रूर विजयी होंगे.
8-Covid19 वायरस खासतौर पर हमारे श्वसन तंत्र, यानि कि respiratory system पर हमला करता है. हमारे Respiratory system को मजबूत करने में जिससे सबसे ज्यादा मदद मिलती है वो है प्राणायाम, यानि कि breathing exercise.
9-आप प्राणायाम को अपने रोजाना के अभ्यास में जरूर शामिल करिए, और अनुलोम-विलोम के साथ ही दूसरे प्राणायाम भी सीखिए.
10-योग एकता के लिए एक शक्ति के रूप में उभरा है और मानवता के बंधनों को मजबूत करता है. इसमें भेदभाव नहीं है. यह जाति, रंग, लिंग, विश्वास और राष्ट्रों से परे है. कोई भी योग को अपना सकता है.