तेलंगाना में कुछ ही महीनों पहले एक महिला वन अधिकारी पर समर्थकों के साथ हमला करने वाले सत्ताधारी पार्टी के नेता को अपने पद पर फिर से बहाल कर दिया गया है. इंडिया टुडे ने 30 जून को इस हमले का वीडियो प्रसारित किया था, जिसके बाद पूरा देश स्तब्ध रह गया था.
तेलंगाना के सिरपुर कागजनगर में वन अधिकारी अनिता अपनी टीम के साथ वृक्षारोपण करवा रही थीं, तभी स्थानीय विधायक कोनारू कोनप्पा के भाई कोनारू कृष्णा ने अपने समर्थकों के साथ उन पर लाठी, डंडों और बांस से हमला किया था . अनिता को काफी चोटें आई थीं, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
अब उससे भी ज्यादा स्तब्ध करने वाला निर्णय सामने आया है. आरोपी कोनारू कृष्णा को फिर से जिला परिषद के डिप्टी चेयरमैन पद पर बहाल कर दिया गया है. कोनारू कृष्णा तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के विधायक कोनारू कोनप्पा के भाई हैं. महिला अधिकारी पर हमले के समय वह जिला परिषद में डिप्टी चेयरमैन के पद पर थे.
क्यों हुए थे गिरफ्तार?
हमले के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और समर्थकों के साथ उन्हें गिरफ्तार किया गया था. यहां तक कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी इस हमले की निंदा की थी. उस समय दबाव के चलते कृष्णा को पद से भी हटना पड़ा था. हालांकि, इस हमले के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने कोई प्रतिक्रिया देने की जगह चुप्पी साध ली थी.
यहां तक कि उन्होंने जख्मी हालत में अस्पताल में भर्ती अधिकारी से भी न बात की और न ही अस्पताल जाकर मुलाकात की, जबकि अस्पताल उनके आवास से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर था.
मुख्यमंत्री ने की थी तारीफ
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री राव ने विधायक कोनारू कोनप्पा और उनके भाई की खुलकर तारीफ की थी. बजट सत्र के दौरान वन भूमि पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा था कि मैं प्रजा दरबार लगाऊंगा और सच्चाई का पता करूंगा. कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं.
उन्होंने कहा था कि मैंने वन प्रशासन और विधायक से कहा है कि विधायक के भाई अच्छे आदमी हैं, बुरे आदमी नहीं हैं. उन्होंने भारी बहुमत से जिला परिषद का चुनाव जीता था. वे आदिवासियों और उनके अधिकारों के लिए प्रशासन के सामने खड़े रहे लेकिन उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज हुए. यह मुझे दुखी करता है.
वन विभाग के अधिकारियों में आक्रोश
हमले के बाद वन अधिकारियों ने विधायक और उनके भाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था. इस घटना पर मुख्यमंत्री के बयान और अब आरोपी नेता की पद पर वापसी के चलते वन अधिकारियों में आक्रोश है. गौरतलब है कि पीड़ित अधिकारी अनीता, जो कि हमले के समय ड्यूटी पर थीं और उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था. विधायक के भाई और उनके समर्थकों ने अनीतो के खिलाफ SC/ST प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था.