पश्चिम बंगाल के आठ जिलों पर सूखे का खतरा मंडरा रहा है. प्रदेश के कृषि मंत्री नरेन डे ने को बताया कि प्रदेश सरकार इन जिलों को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए अभी 15 अगस्त तक बारिश का और इंतजार करेगी.
उन्होंने बताया, ‘स्थिति बहुत गंभीर है और कम बारिश ने धान की खेती और कृषि उत्पादन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. आम तौर पर 50 फीसदी कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है.’ मंत्री ने कहा, ‘ऐसी स्थिति में धान का उत्पादन बहुत बुरी तरह से प्रभावित होगा.’ उन्होंने बताया कि पुरूलिया, बांकुड़ा, हावड़ा, हुगली और बीरभूम जिले में लगभग सूखे जैसी स्थिति है.
डे ने बताया कि खास तौर पर पुरूलिया कम बारिश से बुरी तरह प्रभावित है. उन्होंने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार वैकल्पिक फसलों के बारे में सोच रही है, जैसे मक्का और दालें, जिनमें कम पानी की जरूरत पड़ती है.
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए लगभग 120 मिमी पानी की रोज जरूरत है, ताकि फसलों को बचाया जा सके.
मौसम केंद्र के सूत्रों के मुताबिक मानसून का यह व्यवहार चिंता का सबब है और आगे भी कम दबाव के कोई संकेत नहीं हैं.