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डीएस हुड्डा ने कहा, कांग्रेस जॉइन नहीं की, सिर्फ टास्क फोर्स का हिस्सा हूं

डीएस हुड्डा ने इंडिया टुडे से कहा कि टास्क फोर्स का काम देश की सुरक्षा से जुड़ी नीतियां बनाना है और इसकी रिपोर्ट चुनाव से पहले आएगी. टास्क फोर्स में अलग अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ होंगे जो नीतियां बनाने में अपना योगदान देंगे.

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बीते गुरुवार को पुलवामा में हुए भयानक आतंकी हमले के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक टास्क फोर्स बनाई है. इस टास्क फोर्स की अगुवाई लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा करेंगे. डीएस हुड्डा सर्जिकल स्ट्राइक की उस टीम का हिस्सा रह चुके हैं जिसने 2016 में पाकिस्तानी आतंकी लॉन्चपैड पर हमला किया था. यह टास्कफोर्स राष्ट्रीय सुरक्षा पर कांग्रेस को अपनी राय देगी. इसकी रिपोर्ट चुनाव से पहले आएगी जिसे कांग्रेस अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कर सकती है. इस टास्क फोर्स में अलग अलग क्षेत्रों के कई एक्सपर्ट होंगे जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी राय देंगे.

डीएस हुड्डा ने गुरुवार को इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई से बात की. टास्क फोर्स के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया और यह भी साफ कर दिया कि वे टास्क फोर्स का हिस्सा जरूर हैं लेकिन कांग्रेस जॉइन नहीं कर रहे हैं. हुड्डा ने कहा, 'फिलहाल मेरा काम टास्क फोर्स जॉइन करना है. इस टीम में अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ होंगे. मिलिट्री, डिप्लोमेसी और पुलिस बल से जुड़े लोग इसमें शामिल होंगे. सबकी कोशिश होगी देश में सुरक्षा के मुद्दे पर एक खास रणनीति बनाने की. फिलहाल चुनौती यही है कि टास्क फोर्स के लिए कैसे कोई रणनीति बनाई जाए. हमारा ध्यान इस पर है कि सुरक्षा और डिप्लोमेसी के मुद्दे पर टास्क फोर्स अगले पांच साल के लिए कैसे काम करे. मैं कांग्रेस पार्टी जॉइन नहीं कर रहा हूं.'

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इंडिया टुडे ने हुड्डा से पूछा, क्या यह द्विपक्षीय मामला है जिसमें टास्क फोर्स सरकार और विपक्ष दोनों को सुझाव देगी. या फिर कांग्रेस पार्टी को सुझाव देना है कि सुरक्षा पर कोई रणनीति बने ताकि भविष्य में पुलवामा जैसी घटना न हो. इसके जवाब में डीएस हुड्डा ने कहा, 'टास्क फोर्स कुछ नीतियां बनाएगी जो देश की सुरक्षा नीतियों को कुछ निर्देश दे सके. इस बारे में मैंने राहुल गांधी से बात की थी. उन्होंने इसे बनाने का सुझाव दिया था जिसपर मैं समहत हो गया. इससे जुड़ी रिपोर्ट एक बार हमारे पास आ जाए तो पब्लिक में इसके बारे में सबकुछ बताया जाएगा.'

हुड्डा ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में कहा कि 'मेरे खयाल से यह अच्छी बात है जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर बातचीत चल रही है. यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में देश को काफी पहले से जरूरत थी. टास्क फोर्स की पूरी रिपोर्ट आने के बाद इसपर विस्तृत चर्चा होगी, लोगों की राय ली जाएगी और इसे जरूरत पड़ने पर सुधारा भी जाएगा. यह अच्छी बात होगी कि सभी लोग इसे देख-सुन और समझ सकेंगे.'

राजदीप सरदेसाई ने हुड्डा से पूछा कि 'आप राहुल गांधी की इस योजना पर काम कर रहे हैं तो इसे कांग्रेस पॉलिसी ग्रुप का भी नाम दिया जा सकता है. हो सकता है आप जो सकारात्मक सुझाव देंगे उसे राजनीतिक मानकर सरकार को अपनाने में दिक्कत आए. इस मुद्दे का भी राजनीतिक ध्रुवीकरण हो सकता है. आप क्या इस चिंता में हैं कि आपका नाम कांग्रेस-बीजेपी के बीच फंस गया है? इस पर हुड्डा ने कहा, 'चिंताएं तो सब जगह होती हैं लेकिन यकीन हो कि आप कुछ अच्छा कर रहे हैं या राष्ट्रहित में कर रहे हैं तो ऐसी चिंताएं दरकिनार की जा सकती हैं. मैं साफ कर देना चाहता हूं कि कांग्रेस अध्यक्ष ने टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया था. पुलवामा हमले के काफी पहले इस पर बात हुई थी. इसलिए हम इसे पुलवामा से सीधा जोड़कर नहीं देख सकते.'

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अगला सवाल था, क्या पुलवामा हमले के काफी पहले इस पर बात हुई थी. क्या आप मानते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक-2 की जरूरत पड़ेगी क्योंकि जवानों की शहादत जारी है, आतंकी हमले भी हो रहे हैं. ऐसे में इस टास्क फोर्स पर इन घटनाओं का क्या असर पड़ेगा? इस पर हुड्डा ने कहा कि 'मेरे दिमाग में यह बात जरूर है कि पुलवामा हमले के बाद कुछ कार्रवाई होनी चाहिए. सरकार ने भी कहा है कि वह आगे कार्रवाई करेगी. सब लोग आगे आ रहे हैं और मिलकर साथ देने की बात कर रहे हैं. निश्चित तौर पर अब बात पहले वाली नहीं होगी जो अब तक होती आई है.'

इस पर राजदीव सरदेसाई ने सवाल पूछा कि इसका मतलब क्या यह लगाना चाहिए कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ कोई मुंहतोड़ जवाब देगी. या फिर कोई कार्रवाई करने से पहले हमें सावधानी बरतनी चाहिए? इस पर हुड्डा ने कहा कि हमें हर कदम पर सोच समझ कर फैसला लेना चाहिए. मुझे पूरा भरोसा है कि जो लोग अथॉरिटी में हैं, सेना से बातचीत करने के बाद कोई कदम उठाएंगे. मेरा मानना है कि लोगों के जज्बात को देखकर कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. हां, हमें कुछ न कुछ कदम जरूर उठाने चाहिए. इसके क्या विकल्प हो सकते हैं, बाद में उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर गंभीरता से बातचीत होनी चाहिए. यह एकतरफा प्रक्रिया नहीं है इसलिए सोच समझ कर आगे बढ़ाना होगा लेकिन मेरा यह भी मानना है कि अब हाथ पर हाथ धर कर बैठने का समय नहीं.

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पुलवामा हमले के बाद इंटेलीजेंस की नाकामी पर सवाल उठाए जा रहे हैं. 300 किलो विस्फोटक घटना स्थल पर कैसा पहुंचा, इस पर भी सवाल पूछा जा रहा है. ऐसे सवाल पब्लिक में उठाए जाने चाहिए या नहीं, इस पर भी बहस हो रही है. इस पर हुड्डा ने जवाब दिया कि ऐसे सवाल पूछे जाने में कोई बुराई नहीं है लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है कि हम बीती बातों पर फोकस न करें. आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए क्या किया जाना चाहिए, इसपर बात होनी चाहिए. बीती किसी घटना पर बात करने से मुद्दे का हल नहीं निकलेगा.

अंतिम सवाल कि क्या आपको लगता है कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट चुनाव से पहले आएगी और यह मेनिफेस्टो का हिस्सा होगी, या यह मामला लंबा खींचने वाला है. इसके जवाब में हुड्डा ने कहा कि चुनाव से पहले रिपोर्ट आएगी, इसलिए हम 30 दिन का टाइमफ्रेम मानकर चल रहे हैं. मैं राहुल गांधी से मिला था. वे इस मुद्दे पर दिलचस्पी ले रहे हैं इसलिए टास्क फोर्स पर समहति बनी है.      

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