केंद्र द्वारा भाकपा (माओवादी) को प्रतिबंधित किये जाने बाद माकपा ने कहा कि इस कदम से समस्या का कोई समाधान नहीं होगा, क्योंकि वामपंथी चरमपंथ से राजनैतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर मोर्चा लेने की जरूरत है.
माओवादियों को अलग-थलग करने की जरूरत
पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने कहा, ''केंद्र के पास बहुत सी शक्तियां हैं (किसी भी संगठन को प्रतिबंध करने की). पश्चिम बंगाल में हमारा रूख है कि माओवादियों से राजनैतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संघर्ष करने की जरूरत है. राजनैतिक संघर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें लोगों से पृथक करने की जरूरत है क्योंकि उन्होंने संगठित होना शुरू कर दिया है.''
नाम बदल सकता है प्रतिबंधित संगठन
माओवादियों पर प्रतिबंध का विरोध किये जाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इससे उद्देश्य पूरा नहीं होगा. वे अपना नाम बदल सकते हैं अपना नामकरण और अपना काम जारी रख सकते हैं. करात ने कहा कि माकपा कार्यकर्ताओं को पश्चिम बंगाल के कुछ भागों में माओवादी निशाना बना रहे हैं, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में हमने पूरी पार्टी को राजनैतिक अभियान चलाने और उनके खिलाफ लड़ाई के लिए प्रेरित किया है. माकपा पोलित ब्यूरो के सीताराम येचुरी ने खतरे से निपटने के संबंध में दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया.