उच्चतम न्यायालय ने गुलबर्ग सोसायटी दंगे के मामले में मजिस्ट्रेट को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शिकायत का फैसला करने का आदेश दिया है और उससे जुड़े घटनाक्रम इस प्रकार हैं-
27 फरवरी, 2002: गोधरा ट्रेन नरसंहार.
फरवरी-मई, 2002: गुजरात के विभिन्न हिस्सों में दंगे हुए.
28 फरवरी, 2002: अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसायटी में दंगे में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की मौत.
08 जून, 2006: जाफरी की विधवा जाकिया ने मोदी और 61 के खिलाफ शिकायत दर्ज की.
02 नवंबर, 2007: गुजरात उच्च न्यायालय ने मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की जाफरी की मांग खारिज की.
03 मार्च, 2008: उच्चतम न्यायालय ने जाफरी की याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस दिया और न्यायालय की मदद के लिए अदालत मित्र नियुक्त किया गया.
26 मार्च, 2008: न्यायालय ने इन मामलों की जांच के लिए सीबीआई के पूर्व निदेशक आर के राघवन की अगुवाई में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) नियुक्त किया.
27 अप्रैल, 2009: उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी को जाफरी की शिकायत की पड़ताल करने का निर्देश दिया.
10 मई, 2010: एसआईटी ने शीर्ष अदालत में अपनी पहली रिपोर्ट पेश की एवं कहा कि कुछ पुलिस अधिकारियों तथा राज्य के एक मंत्री के खिलाफ और जांच की आवश्यकता है.
17 नवंबर, 2010: एसआईटी ने और जांच के बाद एक दूसरी रिपोर्ट पेश की.
23 नवंबर, 2010: वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के स्थान पर वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन अदालत मित्र बने, क्योंकि साल्वे ने इस पद बने रहने की अनिच्छा जतायी थी.
15 मार्च, 2011: उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी को अदालत मित्र की ओर से दिए गए नोट के आधार पर मामले की और जांच करने का निर्देश दिया.
05 मई, 2011: शीर्ष अदालत ने अदालत मित्र से एसआईटी जांच का स्वतंत्र मूल्यांकन करने को कहा.
25 जुलाई, 2011: अदालत मित्र ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी.
12 सितंबर, 2011: उच्चतम न्यायालय ने मोदी के खिलाफ आदेश पारी करने से इनकार किया और संबंधित मजिस्ट्रेट को मामले का फैसला करने का निर्देश दिया.