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चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती देंगे स्वामी

जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस की मान्यता रद्द कराने के लिए दायर याचिका खारिज करने के चुनाव आयोग के निर्णय को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है.

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सुब्रमण्यम स्वामी
सुब्रमण्यम स्वामी

जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस की मान्यता रद्द कराने के लिए दायर याचिका खारिज करने के चुनाव आयोग के निर्णय को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है.

चुनाव आयोग द्वारा याचिका खारिज किये जाने के एक दिन बाद डॉ स्वामी ने आयोग को एक पत्र लिखा है. डॉ स्वामी ने इस याचिका में कांग्रेस की मान्यता रद्द करने का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि इस पार्टी ने एसोसिएट जर्नल्स नाम की कंपनी को 90 करोड़ रुपये का कर्ज देकर कानून तोड़ा है. असोसिएट जर्नल्स ‘नेशनल हेराल्ड’ नाम का अखबार चलाती थी जो अब बंद हो चुका है.

डॉ स्वामी का कहना था कि चुनाव आयोग ने उन्हें कानूनी नजरिए से अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को निश्चित तौर पर इस बात का अहसास होना चाहिए कि एक न्यायाधिकरण के तौर पर उसे न केवल न्याय देना है बल्कि यह भी देखना है कि इंसाफ दिया गया है.

स्वामी ने पत्र में कहा, ‘आपके सामने जो मेरी याचिका थी उस पर किसी तरह की जांच से तो आपने पल्ला झाड़ लिया और आपके द्वारा मेरी याचिका पर अपनाया गया दृष्टिकोण पहले ही प्रायोजित तरीके अखबारों में लीक कर दिया.’

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उन्होंने कहा, ‘...वास्तविकता तो यह है कि चुनाव आयोग ने जनता के बीच अपनी विश्वासनीयता गंवायी है. अब मुझे इन मुद्दों को अदालतों में निपटाना होगा.'

स्वामी ने कहा कि आयोग ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 29ए-सी का उल्लंघन करने पर किसी पार्टी की मान्यता रद्द करने का अधिकार उसके पास नहीं है.

जनता पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि अंतिम फैसला करने से पहले मामले की सुनवाई की जरूरत थी. उन्होंने कहा, ‘ये उपधाराएं बताती हैं कि एक पार्टी क्या कर सकती है, लिहाजा सामान्य उपबंध कानून के साथ तालमेल बिठाकर इसका मतलब यह निकाला जाना चाहिए कि इन उप-धाराओं के तहत मंजूर किसी गतिविधि की चूक पर पाबंदी है.’

स्वामी ने कहा, ‘इसलिए यह बहस का एक बिंदु है जिस पर आपको सुनवाई करनी चाहिए थी और दोनों पक्षों को सुनना चाहिए था.’

उन्होंने आरोप लगाया कि जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ऐसे कर्ज देना शुरू कर दे जिसका इस्तेमाल रियल एस्टेट की खरीद में होता है तो जनहित की रक्षा करनी पड़ती है.

स्वामी ने कहा, ‘यह वाकई आदर्श आचार संहिता के तहत आपकी जिम्मेदारी और संभावनाओं की व्याख्या का सवाल है.’

स्वामी ने आयोग पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि एक अखबार में प्रकाशित उनके एक लेख में की गयी टिप्पणी के बाद उनकी पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर आयोग ने विचार किया.

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जनता पार्टी प्रमुख ने कहा कि आयोग ने उच्चतम न्यायालय की पूर्व व्यवस्था के बावजूद यह याचिका मेरी टिप्पणी के लिए मेरे पास भेजी थी. न्यायालय ने अपनी व्यवस्था में कहा था कि आयोग को किसी भी दल का पंजीकरण खत्म करने का अधिकार नहीं है.

स्वामी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस ओर ध्यान आकषिर्त किया तो ‘आयोग उसकी याचिका पर बैठ गया और उस पर कुछ भी नहीं किया जबकि कांग्रेस की ओर से निर्वाचन कानूनों का उल्लंघन करने पर पार्टी की मान्यता रद्द करने संबंधी मेरी याचिका में आपने इतनी तेजी से काम किया कि मुझे यह देखकर ताज्जुब होता है कि क्या पहले की नजीरों को देखने के लिए भी आपके पास वक्त था.’

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