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Ground Report: राजस्थान के सरकारी स्कूलों की हकीकत, वादा इंग्लिश मीडियम का, पर ना किताब है और न टीचर

राज्य के सरकारी स्कूलों में पिछले साल के मुकाबले करीब 6 लाख छात्र कम हो गए हैं. स्कूलों में एक लाख से ज़्यादा टीचरों के पद भी ख़ाली हैं. जिसके चलते जो छात्र स्कूल आ भी रहे हैं, वो टीचर की कमी के चलते टाइम पास करके चले जाते हैं.

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राजस्थान के सरकारी स्कूलों (Rajasthan Govt Schools) को इंग्लिश मीडियम बनाया जा रहा है. बावजूद इसके इन सरकारी स्कूलों में पिछले साल के मुकाबले 6 लाख से ज़्यादा छात्र कम हो गए हैं. इतना ही नहीं, राज्य के सरकारी स्कूलों (Government Schools in Rajasthan) में एक लाख से ज़्यादा टीचरों के पद भी ख़ाली हैं. जिसके चलते जो छात्र स्कूल आ भी रहे हैं, वो टीचर की कमी के चलते टाइम पास करके चले जाते हैं. वहीं राज्य के मंत्री के गांव के स्कूल में भी हालत बदतर है. जहां टीचरों की कमी की वजह से नाराज़ ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला लगा दिया है.

बता दें कि जयपुर के राजकीय उच्च विद्यालय, छोटाअखाड़ा को राजस्थान सरकार ने इंग्लिश मीडियम स्कूल घोषित किया था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी गहलोत सरकार के इस कदम की जमकर तारीफ की थी. लेकिन स्कूल की हालत किसी से छिपी नहीं है. पिछले साल इसे हाई स्कूल बनाया गया था. आजतक की टीम जब 11वीं कक्षा में पहुंची तो दो छात्राएं सेल्फ़ स्टडी करती मिलीं, क्योंकि हाई स्कूल में एक भी टीचर नहीं है.

वहीं पढ़ाई के लिए सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी की ही किताब मिली, जिसे दसवीं के टीचर पढ़ा देते हैं. क्लास में एक कोने में बैठी टीचर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह यूं हीं आकर बैठ गई हैं, वह तो छोटी क्लास की संस्कृत टीचर हैं.

अब आप सोच रहे होंगे कि स्कूल में दो ही छात्र हैं क्या? तो बता दें कि राजस्थान के 64 हज़ार सरकारी स्कूलों में इस वर्ष 6 लाख 11 हज़ार नामांकन कम हुए हैं. इसके पीछे टीचरों की कमी होना वजह बताई जा रही है. कारण, सरकारी स्कूलों में एक लाख 13 हज़ार 860 टीचर के पद ख़ाली हैं. इसी स्कूल में प्राथमिक विद्यालय में आठ की जगह पांच टीचर हैं, बाकि बीएड की इंटर्नशिप वाली छात्राएं पढ़ा रही हैं. स्कूल के प्रिंसिपल एस गोयल से जब इस पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि टीचर लगाना तो सरकार का काम है.

दौसा में भी ऐसे ही हालात

उधर, राजस्थान के कृषि विपणन मंत्री मुरारीलाल मीणा के दौसा स्थित अलियापाड़ा गांव के स्कूल की भी हालत ऐसी ही है. टीचरों की कमी के चलते गुस्साए ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि एक से लेकर 12वीं तक के लिए केवल 5 टीचर हैं. टीचरों की कमी वजह से छात्र सरकारी स्कूल से मुंह मोड़ रहे हैं. 

गौरतलब है कि सरकार ने लक्ष्य रखा था कि इस साल 10 फ़ीसदी नामांकन बढ़ाया जाएगा, मगर जहां 2021-22 में 97 लाख 13 हज़ार 904 छात्रों ने एडमिशन लिया था तो वहीं 2022-23 के लिए घटकर 91 लाख 2 हज़ार 982 हज़ार ही आए. इस पर राज्य के शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि सरकारी स्कूलों में जो बच्चे आए थे, वो कोरोना की वजह से चले गए.

बता दें कि राजस्थान में रातों-रात सरकारी शिक्षा का बंटाधार नहीं हुआ है. ये वो बंद खंडहर स्कूल हैं, जिन्हें वसुंधरा सरकार ने टीचर की कमी की वजह से समानीकरण के नाम पर बंद कर दिया था. एक ही स्कूल में तीन-तीन स्कूल चल रहे हैं. टीचर भर्ती परीक्षा पेपर आउट होने की वजह से दो सालों से अटकी हुई है. अकेले टीचरों की कमी ही नहीं, बल्कि स्कूलों में पीने के पानी और सफ़ाई तक की व्यवस्था नहीं है.

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