उच्च न्यायालय ने एक आंदोलन के संबंध में शासन और आयोजकों को फटकार लगाई. अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी आंदोलन संविधान के दायरे से बाहर नहीं हो सकता है. न्यायालय ने कहा कि "कोई भी बात, कोई भी आंदोलन ये संविधान से बाहर होके नहीं हो सकता है." लोगों को हुई तकलीफों, जैसे रास्ते बंद होना, व्यापार पर असर और स्कूल-कॉलेजों को हुई असुविधा को गंभीरता से लिया गया.