scorecardresearch
 

प्रमोशन में रिजर्वेशन: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिया दो हफ्ते का वक्त, मांगी कानूनी अड़चनों की जानकारी

प्रमोशन में रिजर्वेशन मसले (Reservation in promotion) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सभी राज्यों से पूछा है कि उनको क्या-क्या कानूनी अड़चनें आ रही हैं.

प्रमोशन में रिजर्वेशन मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई प्रमोशन में रिजर्वेशन मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में रिजर्वेशन मसले पर सुनवाई हुई
  • अब कोर्ट ने राज्य सरकारों को दो हफ्ते का वक्त दिया

प्रमोशन में रिजर्वेशन (आरक्षण) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज मंगलवार को सुनवाई हुई. फिलहाल कोर्ट ने मसले को 5 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया है, इस वक्त में राज्यों को अपनी तरफ से उन बातों की लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनको लेकर कानूनी अड़चनें आ रही हैं. कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला के खिलाफ जारी अवमानना के नोटिस को वापस लेने से भी इनकार किया.

सुनवाई के दौरान राज्यों ने प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर जल्द सुनवाई की गुजारिश की. कहा गया कि विभिन्न हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों की वजह से विरोधाभास पैदा हुआ है, जिसके चलते कई पोस्ट खाली पड़ी हैं. पिछले कुछ सालों से कुछ राज्यों में यह मसला अटका हुआ है, जिसको लेकर हजारों सरकारी पोस्ट खाली पड़ी हैं और प्रमोशन भी रुके हुए हैं.

5 अक्टूबर से शुरू होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 5 अक्टूबर से प्रमोशन में रिजर्वेशन (Reservation in promotion) पर फाइनल सुनवाई शुरू होगी. कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि उनके राज्यों में क्या कानूनी अड़चनें आ रही हैं, उसकी लिस्ट दो हफ्तों में तैयार करके कोर्ट को सौंपनी है.

सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला के खिलाफ जारी अवमानना के नोटिस को वापस लेने से भी इनकार किया है. बता दें कि बिहार में 'एड हॉक के आधार पर' प्रमोशन देने के लिए उनके खिलाफ यह नोटिस जारी हुआ था. बेंच ने कहा कि इसपर बाद में चर्चा की जाएगी.

सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि प्रमोशन में रिजर्वेशन को लेकर पहले भी कई गाइडलाइंस बनाई गई हैं और कई फैसलों में उनका जिक्र भी हुआ है. इसको लागू करना राज्यों पर निर्भर करता है कि वह किस तरह पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देती हैं. 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साल 2020 में कहा था कि सरकारी नौकरियों (Government Jobs) में प्रमोशन में आरक्षण मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) नहीं है और इसे लागू करना या न करना राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर करता है. कोर्ट ने कहा कि कोई अदालत एससी और एसटी वर्ग (SC/ST) के लोगों को आरक्षण देने का आदेश जारी नहीं कर सकती. इस टिप्पणी के बाद ऐसी बातें होने लगी थीं कि आरक्षण खत्म हो सकता है. सड़क से संसद तक हंगामा हुआ था.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें