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मध्य प्रदेश चुनाव 2018: सागर सीट पर BJP का कब्जा कायम, शैलेंद्र जैन जीते

मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2018 के बाद आज मतगणना पूरी हो चुकी है. प्रदेश की सागर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शैलेंद्र जैन और कांग्रेस प्रत्याशी नेवी जैन के बीच मुकाबला रहा. शैलेंद्र जैन ने जीत दर्ज कर बीजेपी का कब्जा कायम रखा है.

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बीजेपी( फोटो- PTI)
बीजेपी( फोटो- PTI)

मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2018 के बाद आज मतगणना पूरी हो चुकी है. प्रदेश की सागर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शैलेंद्र जैन और कांग्रेस प्रत्याशी नेवी जैन के बीच मुकाबला रहा. नतीजों में शैलेंद्र जैन ने दोबारा जीत दर्ज कर बीजेपी का कब्जा कायम रखा है.

2013 के चुनाव में शैलेंद्र जैन के पहले इस सीट पर सुधा जैन विधायक थीं. वे 1993, 1998 और 2003 में इस सीट पर जीत दर्ज करने में सफल हुई थी. वे मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं, लेकिन 2008 में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया. उनकी जगह शहर बीजेपी अध्यक्ष शैलेंद्र जैन को चुना गया.

2013 में विधानसभा की क्या थी तस्वीर

मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 35 सीट अनुसूचित जाति जबकि 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 148  गैर-आरक्षित सीटें हैं. 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 165 सीटों पर जीत हासिल कर राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 58 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 4 जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी.

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वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार मध्य प्रदेश में 75.05 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 4 फीसदी बढ़कर 74.03 प्रतिशत रहा. 2013 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 70.11 रहा था.

इसके पहले कैसा रहा है वोटिंग का प्रतिशत

1990 में स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में बीजेपी मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए. तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में उतरी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा और बीजेपी की पटवा सरकार हार गई थी.

वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था. उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी. लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में बीजेपी सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई. उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे.

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