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CM रघुवर दासः 2014 में सबसे बड़ी जीत के नायक इस बार सीट भी गंवा बैठे

झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए सोमवार का दिन कई मायनों में बेहद खराब रहा. एक तो पार्टी चुनाव में हार गई तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री रघुवर दास अपनी सीट भी नहीं बचा सके. रघुवर दास जिस सीट जमशेदपुर ईस्ट से चुनाव लड़ रहे थे, पिछली बार वह इसी सीट से सबसे बड़ी जीत के नायक भी रहे थे.

रघुवर दास इस बार तो चुनाव ही हार गए (फाइल फोटो-IANS) रघुवर दास इस बार तो चुनाव ही हार गए (फाइल फोटो-IANS)

  • JMM की अगुवाई वाले गठबंधन को मिला पूर्ण बहुमत
  • मुख्यमंत्री रघुवर दास को जमशेदपुर ईस्ट से मिली हार
  • 2014 चुनाव में सबसे बड़ी जीत रघुवर के खाते में गई थी

झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए आज सोमवार का दिन कई मायनों में बेहद खराब रहा. एक तो पार्टी चुनाव में हार गई तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री रघुवर दास अपनी सीट भी नहीं बचा सके. रघुवर दास जिस सीट जमशेदपुर ईस्ट से चुनाव लड़ रहे थे, वहां से इससे पहले वह 5 बार चुनाव जीत चुके थे और पिछली बार सबसे बड़ी जीत के नायक भी रहे थे.

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को महज 25 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. जबकि पिछली बार 2014 में हुए बीजेपी ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 37 सीटें पर जीत हासिल की थी. 5 साल पहले हुए चुनाव में रघुवर दास राज्य में सबसे बड़ी जीत के नायक बने थे.

सरयू राय को 42 फीसदी वोट

2019 के चुनाव में बीजेपी के बागी उम्मीदवार सरयू राय को 73,945 मत (42.59 फीसदी) मिले तो मुख्यमंत्री और बीजेपी के उम्मीदवार रघुवर दास को महज 58,112 वोट (33.47 फीसदी) मिले. रघुवर दास 1995 से यहां से चुनाव जीत रहे थे और इस बार उनकी नजर छठी जीत पर थी, लेकिन वह अपने जीत के रिकॉर्ड को कायम नहीं रख सके. साथ ही मुख्यमंत्री की कुर्सी भी जाती रही.

रघुवर दास ने जिन अपने साथी सरयू राय को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया उन्हीं सरयू ने बगावती तेवर अपनाते हुए उन्हें उनके ही घर में 15,833 मतों के अंतर से हरा दिया.

जबकि 2014 के चुनाव की बात करें तो रघुवर दास ने जमशेदपुर ईस्ट विधानसभा सीट से 1,03,427 मत हासिल किए थे जबकि उनके खिलाफ मैदान में उतरे कांग्रेस के आनंद बिहार दुबे को महज 33,270 वोट मिले. इस तरह से रघुवर दास ने 70,157 मतों के अंतर से बड़ी जीत हासिल की थी और 2014 विधानसभा चुनाव में यह सबसे बड़ी जीत भी रही.

2 जीत 60 हजार से बड़ी वाली

राज्य विधानसभा चुनाव में इस बार 2 जीत 60 हजार से ज्यादा मतों के अंतर वाले रहे. इस चुनाव में पाकुड़ विधानसभा सीट से सबसे बड़ी जीत हासिल हुई है, लेकिन यह जीत 2014 के रघुवर के रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सकी है.

पाकुड़ विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी आलमगीर आलम ने बीजेपी के वेणी प्रसाद गुप्ता को 65,108 मतों के अंतर से हराया तो बहारागोरा विधानसभा सीट से दूसरी सबसे बड़ी जीत मिली. झारखंड मुक्ति मोर्चा के समीर कुमार मोहंती ने बीजेपी के ही कुनाल शादांगी को 60,565 मतों के अंतर से हराया.

सबसे छोटी जीत

इस विधानसभा चुनाव की सबसे छोटी जीत रही सिमडेगा विधानसभा सीट से, जहां पर कांग्रेस के भूषण बारा ने कांटेदार मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के श्रद्धानंद बेसरा को महज 285 मतों के अंतर से हरा दिया. जबकि पिछली बार सबसे छोटी हार तोरपा सीट से जेएमएम के उम्मीदवार सुदीप गुरिया को बीजेपी के कोचे मुंडा के हाथों मिली. यहां पर हार-जीत के बीच महज 43 मतों का अंतर रहा था.

क्या रहा परिणाम?

राज्य विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को 30 सीटों पर जीत मिली और राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. सहयोगी कांग्रेस पार्टी के खाते में 16 और राष्ट्रीय जनता दल के खाते में 1 सीट आई. इस तरह से गठबंधन को 47 सीटें मिली. सत्तारुढ़ बीजेपी को 25 सीटें ही मिलीं.

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राज्य की इन 4 बड़ी पार्टियों के अलावा बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) को 2 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. जबकि 2014 में आजसू ने 8 विधानसभा सीटों पर लड़ते हुए 5 सीटों पर जीत हासिल की थी. सीपीआईएम, राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 1-1 सीटों पर संतोष करना पड़ा. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) को महज 3 सीटों पर जीत मिली.

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