दुमका के उत्तर में झारखंड के साहिबगंज, गोड्डा और बिहार का बांका जिला है. पूर्व में पाकुड़ और प.बंगाल का बर्धवान जिला है. दक्षिण में जामताड़ा और पश्चिम में देवघर है. यहां के किसान ज्यादातर सब्जियों की खेती करते हैं. यहां के जंगलों में 30 फीसदी वन क्षेत्र औषधीय पौधों और पेड़ों से भरा पड़ा है. यहां तसर सिल्क का भी उत्पादन भारी मात्रा में होता है.
दुमका की राजनीतिः क्या झामुमो इस बार बचा पाएगा अपना गढ़
दुमका में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं. शिकारीपाड़ा, दुमका और जामा. दुमका में 2005 में स्टीफन मरांडी निर्दलीय विधायक चुने गए थे. इसके बाद 2009 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन विधायक बने. 2014 में भारतीय जनता पार्टी की लुईस मरांडी विधायक चुनी गईं. लुईस मरांडी ने हेमंत सोरेन को 5262 वोटों से हराया था. शिकारीपाड़ा से झामुमो के नलिन सोरेन विधायक हैं. जामा से झामुमो की सीता सोरेन विधायक हैं.
दुमका की आबादी 13.21 लाख है, साक्षरता दर 61.02 फीसदी है
2011 की जनगणना के अनुसार दुमका जिले की कुल आबादी 1,321,442 है. इनमें से 668,514 पुरुष और 652,928 महिलाएं हैं. जिले का औसत लिंगानुपात 977 है. जिले के 6.8 फीसदी लोग शहरी और 93.2 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. जिले की साक्षरता दर 61.02 प्रतिशत है. पुरुषों में शिक्षा दर 60.77 फीसदी और महिलाओं में 40.76 प्रतिशत है.
दुमका की जातिगत गणित
दुमका की कुल आबादी में से 624,779 लोग किसी न किसी तरह के रोजगार में लगे हैं. इनमें से 38 फीसदी या तो स्थाई रोजगार में है या साल में 6 महीने से ज्यादा कमाई करते हैं.
दुमका को मंदिरों की भूमि भी कहा जाता है. क्योंकि यहां विश्व धरोहर टेराकोटा से निर्मित मलूटी मंदिर हैं. इसके अलावा बाबा बासुकीनाथ धाम है. जो भगवान शिव का मंदिर है. कहते हैं कि बिना इसका दर्शन किए बाबाधाम का दर्शन पूरा नहीं होता. इसके अलावा दुमका से करीब 31 किलोमीटर दूर स्थित है मसानजोर डैम है. यहां हर रोज लोग पिकनिक मनाने जाते हैं.