scorecardresearch
 

शर्म नहीं, साहस दिखाने का वक्त, MMS कांड के हो जाएं शिकार तो ऐसे उबरें

देशभर में समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें अश्लील वीडियो, एमएमएस लीक होने पर लड़कियों-महिलाओं ने खुदकुशी तक की कोशिश की है या फिर वो घोर डिप्रेशन में चली गई हैं. मनोचिकित्सक इसे लेकर आगाह करते हैं और बताते हैं कि ऐसी स्थिति से कैसे उबरा जाए.

X
प्रतीकात्मक फोटो (Getty) प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

मोहाली की प्राइवेट यूनिवर्सिटी में कुछ लड़कियों के पर्सनल वीडियो साथी छात्रा द्वारा लीक करने का मामला सामने आया है. पहले खबर आई कि जिन छात्राओं को अपने वीडियो लीक होने की जानकारी मिली उन्होंने सदमे में आकर खुदकुशी करने तक की कोशिश की. हालांकि बाद में पुलिस ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया. वैसे देशभर में समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें अश्लील वीडियो, एमएमएस लीक होने पर लड़कियों-महिलाओं ने खुदकुशी तक की कोशिश की है या फिर वो घोर डिप्रेशन में चली गई हैं. मनोचिकित्सक इसे लेकर आगाह करते हैं और बताते हैं कि ऐसी स्थिति से कैसे उबरा जाए.

क्या करें पीड़‍ित, जिसका एमएमएस लीक हो जाए  

इहबास (Institute of Human Behavior and Allied Sciences) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि इस तरह के मामले में पीड़िता की मानसिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है. वो बहुत तेजी से तनाव और अवसाद से घिर जाती है. ये एक पोस्ट ट्रॉमा की स्थि‍त‍ि होती है जो किसी बुरी घटना के बाद होती है. ये ट्रॉमा मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं. कई बार लड़कियां इस बारे में अपने परिवार तक से बात तक कर पातीं. फिर भी ऐसे मामलों में परिजनों का साथ आना बहुत जरूरी है. जो भी घर में पीड़िता के सबसे करीबी है, चाहे वो मां हो या बहन या भाई, वो इस बारे में बात करने की खुद पहल करे. 

अब सवाल आता है कि पीड़िता को क्या करना चाहिए? इसका सीधा जवाब है कि उसे सबसे पहले हिम्मत बनाकर रखनी चाहिए. जिन लोगों ने ये क्राइम किया है, दोषी वो हैं, उसे ये याद रखना चाहिए कि उसका काम दोषी को सजा दिलाना है. उसे अपने मन में कोई अपराधबोध नहीं रखना चाहिए. वो परिजनों को इस बारे में बताए कि उसके साथ घटना किन परिस्थितियों में हुई. इस बात को स्वीकार करते ही भीतर का दर्द काफी कम हो जाएगा, लेकिन परिजन भी ऐसे हालात में उसे डांटें नहीं. किसी की फोटो या वीडियो को हथियार बनाने वाला खुद गुनहगार होता है, और इसमें दूसरा व्यक्ति कहीं से भी दोषी या अपराधी नहीं होता. 

भोपाल के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि मेरे पास हाल ही में एक मामला सामने आया था जिसमें पति-पत्नी ने आपसी सहमति से अपने पर्सनल मोमेंट्स का कोई वीडियो बनाया. वीडियो लैपटॉप में सेव था जिसे किसी ने शेयर कर दिया. ये वीडियो उनकी कंपनी और आसपास के लोगों में शेयर हो गया था. किसी तरह पुलिस की मदद से वीडियो हटवाया गया. लेकिन इस घटना से उनकी लाइफ पर काफी बुरा असर पड़ा. पत्नी का कहना था कि इस घटना के बाद से वो किसी से नजरें नहीं मिला पाती हैं. उन्हें लगता है कि जो भी उन्हें देखता है, तो लगता है कि उन्हें जज कर रहा है. इसी कारण उन्होंने घर से निकलना तक कम कर दिया है. 

शर्म में डूबने की नहीं, हिम्मत की जरूरत 

डॉ त्रिवेदी कहते हैं कि शर्म इंसान का सामाजिकता से पनपा आम गुण है, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए. हम जब बच्चे होते हैं तो हमें किसी से शर्म नहीं होती. लेकिन बड़े होते होते सामाजिक दायरों में आकर हम शर्म, इज्जत से खुद को ढक लेते हैं. ये बेहतर समाज के लिए जरूरी कहा जा सकता है, लेकिन आपको ये याद रखना होगा कि इसे इतना भी हावी नहीं करना है कि आपका मानसि‍क स्वास्थ्य ब‍िगड़ जाए. हमें हमेशा ध्यान ये रखना चाहिए कि इंसानी मस्तिष्क भूलने की क्षमता रखता है. अगर आप किसी जगह काम कर रही हैं या पढ़ाई कर रही हैं तो बस कुछ ही दिन इस बात की चर्चा होगी, लेकिन एक समय के बाद कोई इस बात को याद नहीं रखेगा. न ही हर वक्त कोई आपके बारे में ही सोचता है या हर कोई आपको देखकर यही सब सोचता है.

आपका व्यक्त‍ित्व कहीं ज्यादा बड़ा होता है. वैसे भी हर इंसान अपनी जिंदगी की तमाम व्यस्तताओं में है. आप अपने ऊपर जितना अपराधबोध महसूस करेंगे, उतना वो आपको डिप्रेशन की तरफ ले जाएगा. इस स्थिति से बचने के लिए खुद को स्वीकार करना सीखें. जो हुआ, बदला नहीं जा सकता, लेकिन अपने कल में हुई किसी घटना के लिए अपने आज को खराब न करें. ऐसे समय में आपको शर्मिंदा नहीं बल्किी साहस दिखाना होता है. बल्कि  शर्मिंदा उसे होना चाहिए जिसने आपकी प्राइवेसी को चोट पहुंचाई है, आप इस पर लोगों के सामने खुलकर अपनी बात रख सकते हैं.

 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें