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फैक्ट चेक: ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच बीजेपी के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग? ये वीडियो पुराना है

सड़कों पर उमड़ी भारी भीड़ के प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि देश में एक क्रांति की शुरुआत हो गई है. आज तक ने इसका फैक्ट चेक किया है...

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
वीडियो में लोगों को 'वोट चोरी' विवाद के चलते सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करते देखा जा सकता है. 
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये वीडियो अलग-अलग मुद्दों पर महीनों पहले हुए प्रदर्शनों के क्लिप्स को जोड़कर बनाया गया है. इसका वोट चोरी वाले विवाद से लेना-देना नहीं है. 

वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और ‘वोटर लिस्ट रिवीजन’ के मुद्दे पर विपक्ष ने सड़क से लेकर तक चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. 11 अगस्त को राहुल गांधी की अगुवाई में 300 सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक पैदल मार्च निकाला. लेकिन, रास्ते में पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई सांसदों को हिरासत में ले लिया. 12 अगस्त को एक बार फिर राहुल ने बयान दिया कि चुनाव आयोग राष्ट्रीय स्तर पर धांधली कर रहा है. 

इस बीच सड़कों पर उमड़ी भारी भीड़ के प्रदर्शन का एक  सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. ये दो क्लिप्स को जोड़कर बनाया गया है. पहली क्लिप में भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर के ठीक सामने सड़क पर लोगों को ‘नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद’ के नारे लगाते देखा जा सकता है. वहीं, दूसरी क्लिप में काफी बड़ी संख्या में लोग कैंडल मार्च निकालते नजर आ रहे हैं. 

लोग इस को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि देश में एक क्रांति की शुरुआत हो गई है. कई लोग इस प्रदर्शन को हाल ही का बताते हुए ‘वोट चोरी’ के हैशटैग के साथ कर रहे हैं. 

Fact Check

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये दोनों ही वीडियो अलग-अलग मुद्दों पर महीनों पहले हुए प्रदर्शन के हैं. इनका ‘वोट चोरी’ वाले मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है. 

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बीजेपी ऑफिस के सामने प्रोटेस्ट

वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये 28 मई के एक में मिला. इसमें बताया गया है कि ये वीडियो छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का है. 

हमें इस वीडियो का एक  भी मिला. इसमें सड़क पर लोगों के बीच चल रहे ई-रिक्शे पर एक बोर्ड लगा हुआ दिखाई दे रहा है. इस पर लिखा है “मजदूरों को मनरेगा में रोजगार देना होगा.” 

इतना तो यहीं साफ हो जाता है कि इस प्रदर्शन का वोट चोरी वाले मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है. 

 

 

इसके बाद हमें इस प्रदर्शन के बारे में छपी कुछ खबरें भी मिलीं. 16 मई की के मुताबिक छत्तीसगढ़ के दुर्ग में जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष की अगुवाई में ये प्रदर्शन हुआ था. मनरेगा के तहत लोगों को पर्याप्त ना मिलने से नाराज ये लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे. प्रदर्शनकारी राजीव भवन से कलेक्टर ऑफिस तक पैदल रैली करते वक्त बीजेपी कार्यालय के सामने से भी नारेबाजी करते हुए निकले थे. 

राकेश ठाकुर ने खुद अपने फेसबुक अकाउंट से 16 मई को इस प्रदर्शन का  शेयर किया था. इसमें करीब 40 सेकंड के बाद बीजेपी ऑफिस के सामने हो रहे प्रदर्शन को एक अलग एंगल से दिखाया गया है. 

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रात के अंधेरे में कैंडल मार्च 

रिवर्स सर्च करने पर हमें ये एक यूट्यूब चैनल पर 6 दिसंबर, 2024 को अपलोड किया हुआ मिला. इसके डिसक्रिप्शन के मुताबिक ये लोग बिहार लोक सेवा आयोग यानि को लेकर के गांधी विहार में कैंडल  मार्च निकाल रहे थे. 

'इंडिया न्यूज' ने भी इस वीडियो को 6 दिसंबर, 2024 को करते हुए बताया था कि BPSC अभ्यर्थियों ने नॉर्मलाइजेशन के खिलाफ दिल्ली में ये मार्च निकाला था. नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया क्या है, ये बात इस को पढ़कर समझी जा सकती है. 

 

 

बता दें कि बीपीएससी में नॉर्मलाइजेशन लागू करने के खिलाफ प्रदर्शन की शुरुआत बिहार की राजधानी  से हुई थी. सड़क जाम कर विरोध कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे. बाद में ये प्रदर्शन अन्य राज्यों में भी फैल गया था. साफ है, अलग-अलग मुद्दों पर महीनों पहले हुए प्रदर्शनों के वीडियो को वर्तमान में चल रहे वोट चोरी के मुद्दे से जोड़कर पेश किया जा रहा है.  

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