9 जनवरी 1974 को जन्मे फरहान अख्तर बॉलीवुड में डायरेक्टर के बाद एक्टर भी बन चुके हैं लेकिन एक दौर वो भी था जब वे काफी आरामतलब थे और अपने करियर को लेकर खास फिक्रमंद नहीं थे. उन्हें लॉ कॉलेज से निकाला गया था क्योंकि उनकी हाजिरी काफी कम थी. वे कॉलेज पास करने के बाद काफी समय तक घर पर ही रहते थे, जिसके बाद उनकी मां ने परेशान होकर उन्हें काम करने के लिए कहा था. इसके बाद उन्होंने यश चोपड़ा को लम्हे फिल्म के लिए असिस्ट किया था.
फरहान के दिमाग में इसके बाद एक कहानी चलने लगी थी और अब वे एक फिल्म डायरेक्ट करना चाहते थे. उन्होंने लास वेगास और न्यूयॉर्क की ट्रिप के अनुभवों को उन्होंने अपनी डायरी में उकेरा था. 1996 में इस सिलसिले में उन्होंने अपने एक दोस्त की कहानी भी सुनी थी. डायरी के इन्हीं कुछ अनुभवों को उन्होंने स्क्रिप्ट की शक्ल दी.
माना जाता है कि फिल्म में आमिर खान और प्रीति ज़िंटा के किरदार भी फरहान के दो दोस्तों से प्रेरित थे. फरहान अपनी पहली फिल्म के सहारे मेनस्ट्रीम बॉलीवु़ड के बीच एक ऐसी कहानी कहना चाहते थे, जिससे देश का अपर क्लास रिलेट कर पाए और एक मनोरंजक दोस्तों की कहानी जैसा कॉन्सेप्ट उनके दिमाग में था. साउथ बॉम्बे के अपर क्लास लड़कों की कहानी जिसे बिना लार्जर दैन लाइफ़ बनाए, एक रियलिस्टिक तरीके से दिखाया जा सके. इस कॉन्सेप्ट पर उन्होंने दिल चाहता है बनाई जिसमें आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने मुख्य भूमिका निभाई.
पहली ही फिल्म साबित हुई फरहान के लिए टर्निंग प्वाइंट
गौरतलब है कि फरहान के करियर को लेकर उनके पेरेंट्स ही नहीं बल्कि करण जौहर भी चिंता ज़ाहिर कर चुके थे. लेकिन इस फ़िल्म के रिलीज़ के साथ ही फरहान की ज़िंदगी बदल गई. फरहान भी इस फ़िल्म को अपनी लाइफ का टर्निंग पॉइन्ट मानते हैं. उन्होंने एक पूरी जनरेशन की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पर्दे पर उतारा. 'दिल चाहता है' ने बेस्ट फ़िल्म का नेशनल अवॉर्ड भी जीता. आज इस फिल्म रिलीज के 19 सालों बाद फरहान फिल्म तूफान के साथ ही एक एक्टर के तौर पर कामयाब होने की चाह रखते है.