scorecardresearch
 

कादर खान की शख्सियत का वो चेहरा जिसे आपने पहले कभी नहीं देखा

कादर खान कुरान के विद्वान थे, जिन्होंने इस्लामिक पढ़ाई में स्पेशल एकेडमिक सिलेबस को डिजाइन किया था. इसके अलावा उन्होंने अरबी और उर्दू भाषा के कोर्स को सरल भी बनाया था.

Advertisement
X
कादर खान
कादर खान

साल 2018 के आखिरी दिन बॉलीवुड ने महान कलाकारों में से एक कादर खान को खो दिया था. आज कादर खान को दुनिया छोड़े एक साल हो गया है. लेकिन आज भी उनकी जिंदगी और शख्सियत से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जो फैंस को नहीं पता. जैसे क्या आपको पता है कि कादर खान एक साधारण एक्टर ही नहीं थे. वे एक एक्टर के साथ-साथ कॉमेडियन, राइटर और डायरेक्टर भी थे.

कुरान के विद्वान थे कादर खान

एक और खास बात जो लोगों को कादर खान के बारे में नहीं पता वो ये कि वे कुरान के विद्वान थे, जिन्होंने इस्लामिक पढ़ाई में स्पेशल एकेडमिक सिलेबस को डिजाइन किया था. इसके अलावा उन्होंने अरबी और उर्दू भाषा के कोर्स को सरल भी बनाया था. इस बात का खुलासा कादर के एक दोस्त ने किया था.

Advertisement

पूर्व उर्दू पत्रकार और कादर खान के करीबी दोस्त जावेद जमालुद्दीन ने बताया था, 'बॉलीवुड का अहम हिस्सा होने के बावजूद, 1990s की शुरुआत में उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता मौलाना अब्दुल रहमान खान के इस्लामिक पढ़ाई को आगे ले जाने, भाषा को सरल बनाने और उसका सही मतलब समझाने का जिम्मा अपने कंधों पर लिया था.'

कादर खान अफगानिस्तान के काबुल के रहने वाले थे, जिन्होंने भारत-पाक बंटवारे के बाद भारत में ही रहने का फैसला किया था. 1950s की शुरुआत में वे हॉलैंड चले गए थे, जहां उन्होंने अरेबिक और इस्लामिक इंस्टिट्यूट खोला था. हालांकि 1990s की शुरुआत में उनके पिता ने उन्हें वापस बुला लिया और अपनी लिगेसी आगे बढ़ाने को कहा. इसपर कादर खान ने उनसे ये कहकर बहस की थी कि उन्हें इस्लाम, अरबी या उर्दू के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं है. उस समय भले ही कादर बॉलीवुड का बड़ा नाम थे लेकिन इंडस्ट्री में उनकी जगह अभी भी पक्की नहीं थी.

तब उनके पिता ने कहा था कि उन्हें कहानी लिखने या डायलॉग लिखने का ज्ञान नहीं था लेकिन फिर भी बॉलीवुड में आकर उन्होंने ये चीज सीख ली थी. ऐसे ही वे इस्लाम और अरबी-उर्दू भाषा के बारे में सीख जाएंगे. उनके पिता के शब्द कादर को गहरायी तक लगे थे और उन्होंने 1993 में तुरंत Osmania University में Islamic Studies & Arab Literature में एमए की क्लास में अपना नाम लिखवा लिया था.

Advertisement

अपने पिता की इच्छा को पूरा करते हुए कादर खान ने मुंबई में अपनी एक्सपर्ट्स की टीम बैठाई और अपने पुणे कोरेगांव पार्क के बंगले में भी नर्सरी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के लिए कई इस्लामिक कोर्स, जैसे शरीया लॉ आदि डिजाइन किए.

उर्दू पत्रकार के मुताबिक, 'उन्होंने दुबई में KK Institute of Arabic Language & Islamic Studies खोला था. फिर बाद में उन्होंने कनाडा में अरेबिक और इस्लामिक कानून (जैसा कुरान में बताया गया है) के बारे में ट्रेनिंग के मौके खोले थे. उनका मकसद कुरान में बताई बातों को सरल तरीके से साधारण लोगों तक पहुंचाना था. ताकि जो लोग मुस्लिम नहीं हैं, वो भी उसे समझ सकें.

पत्रकार जमालुद्दीन ने आगे बताया, 'कादर के एकेडमिक काम 2005 में पूरे हो गए थे और वे इससे बहुत खुश थे. उन्हें इस बात से सुकून मिला था कि उन्होंने अपने पिता की आखिरी इच्छा को पूरा किया. 2014 के सितम्बर में बीमार होने बावजूद कादर खान हज यात्रा पर गए थे. उनके साथ उनका परिवार और मेडिकल हेल्प थी. उनकी इस यात्रा का वीडियो दुनियाभर में वायरल हुआ था.'

जमालुद्दीन ने कहा, 'वो अपनी पूरी जिंदगी कॉमन मुस्लिम लोगों को अपने कोर्स के बल पर अच्छी शिक्षा देना चाहते थे और चाहते थे कि वे मेनस्ट्रीम एजुकेशन का हिस्सा बनें. वे चाहते थे कि मुस्लिम युवा अपने शिक्षा से स्वतंत्र बने और भारत की तरक्की में योगदान दें.'

Advertisement

उनकी बीमारी के बढ़ने से पहले उन्होंने केके इंस्टिट्यूट की कई ब्रांच भारत और विदेश जैसे अमरीका, यूके, दुबई, कनाडा और अन्य देशों में खोल दी थीं.

Advertisement
Advertisement