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आपके कमरे में कोई रहता है Review: कॉमेडी- हॉरर दोनों ही गायब, बोर करती है स्वरा भास्कर की सीरीज

स्वरा भास्कर और सुमित व्यास की ये वेब सीरीज चार बेचलर्स की कहानी है जो स्टार्टअप शुरू करने की सोचते हैं. अभी स्टार्टअप शुरू हुआ ही नहीं होता है और पहले ही चारों मिलकर एक पुरानी मर्सेडीज कार ईएमआई पर ले लेते हैं.

स्वरा भास्कर स्वरा भास्कर
फिल्म:आपके कमरे में कोई रहता है
2/5
  • कलाकार : स्वरा भास्कर, अमोल पराशर, सुमित व्यास, शक्ति कपूर, नवीन कस्तुरिया, इश्तियाक खान
  • निर्देशक :गौरव एस सिन्हा

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 2 तरह के जॉनर ऐसे हैं जिसे कोई ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता, मगर इन दोनों जॉनर्स की फिल्मों में मजा हमेशा मारक रहता है. हम बात कर रहे हैं कॉमेडी और हॉरर की. अब इन्हीं को अगर मिला दिया जाए तो बन जाता है एक अलग जॉनर. हॉरर-कॉमेडी. इस जॉनर को एंटरटेनमेंट का ओवरडोज कहा जा सकता है. क्योंकि इसमें वो सब होता है जिसे देख दर्शक सबसे ज्यादा एक्साइटेड होते हैं. डर, सस्पेंस, हंसी और मजा. मगर सोचिए कि इस जॉनर की बनी किसी फिल्म या वेब सीरीज में अगर कॉमेडी और हॉरर दोनों की मात्रा बिगड़ जाए तो क्या हो सकता है. वही जो वेब सीरीज आपके कमरे में कोई रहता है के साथ देखने को मिला.

कहानी- 

स्वरा भास्कर और सुमित व्यास की ये वेब सीरीज चार बेचलर्स की कहानी है जो स्टार्टअप शुरू करने की सोचते हैं. अभी स्टार्टअप शुरू हुआ ही नहीं होता है और पहले ही चारों मिलकर एक पुरानी मर्सेडीज कार ईएमआई पर ले लेते हैं. अब बेचलर्स हैं तो इधर-उधर मन का भटकाव आम सी बात है. मगर असली मुसीबत तो तब शुरू होती है जब देर रात पार्टी करने की वजह से चारों को लैंडलॉर्ड घर से बाहर निकाल देता है. चारों बड़ी मुसीबत में पड़ जाते हैं. ऐसे में उनकी मदद करते हैं इरफान भाई. इरफान भाई ने ही चारों को पहले भी कमरा दिलाया होता है और इस बार भी वही ये जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाते हैं. 

मजबूरी वो चीज है जो इंसान को समझौते से गले मिलवाती है. अब जल्दबाजी में इरफान भाई चारों को शहर से थोड़ा दूरी पर कब्रिस्तान के ऊपर बनी एक नई बिल्डिंग में बढ़ियां सा बड़ा फ्लैट दिला देते हैं. फ्लैट में काफी स्पेस होती है, सारी सुविधाएं होती हैं, ऐसे में चारों बेचलर्स का मन ललचा जाता है. अब बेचलर्स हैं तो मन का ललचाना भी आम सी बात है. नई बिल्डिंग अभी पूरी बनकर तैयार भी नहीं हुई होती है और कानूनी पचड़ों में भी फंसी होती है. साथ ही अपने साथ ली होती है एक इतिहास की गुत्थी जो प्रेत-आत्माओं से जुड़ी है. इसी के इर्द-गिर्द ये पूरी कहानी है. 

एक्टिंग-

मैक्स प्लेयर पर रिलीज की गई इस वेब सीरीज में 5 एपिसोड हैं जो बहुत बड़े नहीं हैं. चारों बेचलर्स की बात करें तो सुमित व्यास ने निखिल का रोल प्ले किया है. नवीन कस्तुरिया सुबु के रोल में हैं. अमोल पराशर कवि के रोल में और आशीश वर्मा सनकी के रोल में नजर आए हैं. वहीं स्वरा भास्कर का रोल इस वेब सीरीज में मौसम का है जो थोड़ा सस्पेंसिव तो है मगर इसे और असरदार तरीके से प्ले किया जा सकता था. चारों बेचलर्स के रोल भी ठीक हैं और एक साथ सभी की बॉन्डिंग अच्छी नजर आती है. मगर अलग-अलग सभी बिखरते नजर आते हैं. 

 देखें: आजतक LIVE TV

इस वेब सीरीज को भले ही छोटा रखा गया है मगर शायद कहानी के साथ ठीक तरह से इंसाफ नहीं किया गया. सीन इस्टेबलिश होते ही कब खत्म हो जाएगा पता ही नहीं चलेगा. किसी भी कहानी को लोगों तक पहुंचाने के लिए उसकी स्क्रिप्ट में एक ठहराव का होना बहुत जरूरी होता है. वो ठहराव पूरी वेब सीरीज के दौरान कहीं भी नजर नहीं आएगा. इसी वजह से शायद सुमित व्यास, अमोल पराशर, इस्तियाक खान और स्वारा भास्कर जैसे मंझे हुए कलाकारों के होने के बाद भी उनका अभिनय कहीं नजर नहीं आता. स्क्रिप्ट और डायरेक्शन दोनों की कमी की वजह से इस वेब सीरीज की अच्छी कहानी और एक्टिंग कहीं दबी रह गई.

देखें या नहीं- 

इस वेब सीरीज को एक बार 'जस्ट फॉर फन' के लिए भी अगर देखा जाए तो निराशा ही हाथ लगेगी. मतलब इसे जितना हल्का बनाया गया है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी वेब सीरीज के दौरान बहुत कम ही ऐसे मौके होंगे जब आपकी हंसी छूटेगी वो भी हल्की सी. वहीं डर तो इस वेब सीरीज में दूर-दूर तक कहीं नहीं लगेगा. उसका हल्का सा एहसास भी शायद ना हो. बाकी आपके ऊपर, आपकी वयस्तता के ऊपर और आपके विवेक के ऊपर.


 

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