रणवीर शौरी को इंडस्ट्री के दमदार एक्टर्स में गिना जाता है. तमाम फिल्मों में कई यादगार किरदार कर चुके रणवीर ने अब अपने साथी को-स्टार सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात की है. सुशांत का निधन और इस मामले में शुरू हुई जांच में बॉलीवुड के काम करने के तौर तरीकों पर काफी सवाल उठे थे.
इंडस्ट्री में 'आउटसाइडर' कलाकारों के साथ होने वाले भेदभाव को लोगों ने काफी हाईलाइट किया था. सुशांत के साथ फिल्म 'सोनचिड़िया' में काम कर चुके शौरी ने, उनके साथ जुड़ी अपनी यादें शेयर कीं. उन्होंने यह भी बताया कि इंडस्ट्री में किसी का करियर खराब करने जैसी चीजें सच में होती हैं और यह बात वो डंके की चोट पर कह सकते हैं.
'ये सब इंडस्ट्री में सच में होता है'
न्यूज 18 के अनुसार, एक नई बातचीत में रणवीर ने कहा कि उन्होंने भी इंडस्ट्री में खुद को अकेला पाया है और वो गॉसिप का सब्जेक्ट भी रहे हैं. उन्होंने कहा, 'और दो साल पहले सुशांत के साथ ऐसा हुआ तो मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मुझे बोलना चाहिए. लेकिन आप इंडस्ट्री में किसी से भी पूछ लीजिए, किसी से भी, वो ऑफ द रिकॉर्ड इसके बारे में बात करेंगे. मैं इसके बारे में खुलकर बात कर सकता हूं. मुझे कोई दिक्कत नहीं है. ये पूरी तरह होता है, किसी के खिलाफ गैंग बना लेना, उन्हें साइडलाइन कर देना, किसी को दबा देना, किसी का करियर बर्बाद कर देना. ये होता है. ये एक फैक्ट है.'
फिजिक्स ने करवाई थी दोस्ती
सुशांत से अपनी दोस्ती याद करते हुए रणवीर ने बताया कि वो दोनों ही फिजिक्स से बहुत प्यार करते थे. उन्होंने सुशांत से अपनी बॉन्डिंग याद करते हुए बताया कि सुशांत कई बार उनके घर भी आए थे. रणवीर ने बताया, ''सोन चिड़िया' के ढाई महीन लंबे शूट पर हम में काफी बनती थी. और हम फिजिक्स पर बॉन्ड करते थे क्योंकि हम दोनों को इससे बहुत प्यार करते थे. हमने इस पर काफी बातें की थीं.'
सुशांत को याद करते हुए रणवीर ने बताया कि उन्होंने अपने टेलिस्कोप से उन्हें एक बार चंद्र ग्रहण भी दिखाया था. उन्होंने बताया, 'मुझे याद है जब हम शूट कर रहे थे, तो एक बार ग्रहण लगा था. वो चंद्र ग्रहण था और उसके पीछे शनि भी लाइन-अप हो रहा था. उन्होंने सिर्फ इसके लिए मुम्बई से अपना बड़ा टेलिस्कोप मंगा लिया था. और जब हम धोलपुर में शूट कर रहे थे तो गार्डन में एक बड़ा टेलिस्कोप रखा था. उन्होंने सबको बुला लिया, ड्रिंक्स, कॉकटेल और स्नैक्स और सारी चीजें. और ये सिर्फ एक ही बार हुआ है जब मैंने एक टेलिस्कोप से ग्रहण देखा है और तीनों को सीधा एक लाइन में देखा है. वहां तीनों थे- चंद्रमा, बृहस्पति और शनि. अपनी आंखों से देखा मैंने. और मैं बता रहा हूं, टेलिस्कोप के जरिए अपनी आंखों से पूरा ग्रहण देखना, स्क्रीन पर देखने से बहुत अलग है. इसमें कुछ बहुत अलग होता है... मुझे नहीं पता वो क्या था.'