यूपी के अंतिम छोर पर बसे महराजगंज जिले की नौतनवा विधानसभा सीट प्रदेश की चुनिंदा चर्चित सीटों में से एक है. इस विधानसभा सीट की सियासत पिछले 40 साल से ब्राह्मण और ठाकुर के इर्द-गिर्द ही घूम रही है. ये विधानसभा सीट बाहुबली नेताओं का चुनावी अखाड़ा भी रही है. इसी विधानसभा सीट से सजायाफ्ता अमर मणि त्रिपाठी चार दफे विधायक रहे. वीरेंद्र प्रताप शाही और अखिलेश सिंह दो-दो बार, कुंवर कौशल सिंह और अमन मणि त्रिपाठी एक-एक बार इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
नौतनवा विधानसभा सीट का नाम पहले लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट हुआ करता था. छात्र राजनीति से उभरे बाहुबली नेता वीरेंद्र प्रताप शाही ने लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट से सियासत में कदम रखा. वीरेंद्र प्रताप को अखिलेश सिंह का साथ मिला. निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वीरेन्द्र प्रताप शाही पहली बार अमर मणि को शिकस्त देकर विधायक बने. उस चुनाव में श्रीपद अमृत डांगे वाली कम्युनिस्ट पार्टी से गठबंधन के टिकट पर अमर मणि चुनाव लड़े थे. पांच साल बाद 1985 के चुनाव में भी वीरेंद्र प्रताप शाही को जीत मिली. वीरेंद्र प्रताप की हत्या के बाद 1989 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे अमर मणि त्रिपाठी पहली बार विधायक निर्वाचित हुए.
नौतनवा (लक्ष्मीपुर) विधानसभा सीट से 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर कुंवर अखिलेश सिंह विधायक चुने गए. इसके बाद लगातार तीन चुनाव 1996, 2002 और 2007 में कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और सपा के टिकट पर अमर मणि विधानसभा पहुंचे. कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में वे पहली दफे मंत्री भी बनाए गए लेकिन उसी समय अपहरण के एक मामले में नाम आने के बाद सीएम ने अमर मणि को मंत्री पद से हटा दिया था. 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए परिसीमन के बाद इस सीट का नाम लक्ष्मीपुर से बदलकर नौतनवा विधानसभा सीट हो गया. मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अमर मणि को सजा हो गई जिसके बाद उनके पुत्र अमन मणि चुनाव मैदान में उतरे. नौतनवा सीट से सपा के टिकट पर उतरे अमन मणि को कुंवर अखिलेश सिंह के छोटे भाई कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह ने हरा दिया था.
2017 का जनादेश
नौतनवा सीट से विधायक कुंवर कौशल सिंह सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे. कौशल सिंह के सामने बतौर निर्दलीय अमन मणि ने ताल ठोक दी. अमन मणि तब जेल में बंद थे और उनके चुनाव प्रचार की कमान बहनों नें संभाली. इस दफे चुनावी बाजी अमन मणि के हाथ लगी और वे पहली बार विधानसभा पहुंचने में सफल रहे. अमन मणि ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के कुंवर कौशल किशोर को 32 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था.
सामाजिक ताना-बाना
नौतनवा विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां करीब सात लाख मतदाता हैं. जातीय समीकरणों पर गौर करें तो यहां सबसे अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं. मुस्लिम, निषाद,और पिछड़ी जाति के मतदाताओं की तादाद भी नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में अच्छी खासी है. ये मतदाता भी इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
नौतनवा विधानसभा सीट से विधायक अमन मणि त्रिपाठी का दावा है कि उनके कार्यकाल के दौरान इलाके में विकास की गंगा बही है. अपने कार्यकाल के दौरान विकास कार्य गिनाते हुए विधायक बताते हैं कि महाव नाला बार बार टूट जाता था. उसे लेकर कार्य कराया. इलाके में सड़कों का जाल बिछवाया. हर घर तक बिजली पहुंचवाई.