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Chharra Assembly Seat: बीजेपी और सपा में रहा है मुकाबला, इसबार क्या होगा?

छर्रा विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 15 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे. मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच ही रहा. बीजेपी के प्रत्याशी ठाकुर रावेंद्र पाल सिंह विजयी रहे थे.

यूपी Assembly Election 2022 छर्रा विधानसभा सीट यूपी Assembly Election 2022 छर्रा विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • छर्रा में कभी नहीं जीत सकी है बसपा
  • बीजेपी के रावेंद्र पाल सिंह हैं विधायक

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की एक विधानसभा सीट है छर्रा विधानसभा सीट. छर्रा विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) को कभी जीत नहीं मिल सकी. छर्रा विधानसभा सीट साल 2012 में अस्तित्व में आई. इससे पहले ये विधानसभा सीट गंगिरी विधानसभा सीट के नाम से जानी जाती थी. अलीगढ़ जिले में आने वाली छर्रा विधानसभा सीट पड़ोसी जिले हाथरस की लोकसभा सीट में शामिल है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

साल 1952 से 1962 तक कांग्रेस के श्रीनिवास इस विधानसभा सीट से विधायक बने थे. साल 1969 में अनीसुर्रहमान कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे. दो बार भारतीय जनता पार्टी के राम सिंह और एक बार समाजवादी पार्टी के ठाकुर राकेश सिंह विधायक निर्वाचित हुए थे. मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ठाकुर रावेंद्र पाल सिंह बीजेपी के विधायक हैं.

2017 का जनादेश

अलीगढ़ की छर्रा विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 15 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे. मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच ही रहा. बीजेपी के प्रत्याशी ठाकुर रावेंद्र पाल सिंह ने सपा के ठाकुर राकेश सिंह 56 हजार से अधिक वोट के बड़े अंतर से हरा दिया था. बीजेपी के उम्मीदवार को 1 लाख 10 हजार 738 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे सपा उम्मीदवार को 56604 वोट मिले थे. बसपा प्रत्याशी सगीर अहमद तीसरे स्थान पर रहे थे.

सामाजिक ताना-बाना

अलीगढ़ जिले की छर्रा विधानसभा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख से ज्यादा वोटर हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में जाटव और लोध मतदाताओं की अच्छी संख्या है. मुस्लिम मतदाता भी प्रभावशाली भूमिका में हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में ठाकुर और ब्राह्मण मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

छर्रा विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक ठाकुर रावेंद्र पाल सिंह का जन्म अलीगढ़ के ही सदर तहसील इलाके के गांव असदपुर कयाम में हुआ था. रावेंद्र पाल साल 1989 में संघ से जुड़ गए थे. कल्याण सिंह को अपना गुरु मानने वाले रावेंद्र पाल सिंह साल 1991-1992 में कल्याण सिंह के साथ बीजेपी में जुड़ गए. वे साल 1995-1996 में युवा मोर्चा बीजेपी के अलीगढ़ जिलाध्यक्ष बनाए गए. केंद्रीय उपभोक्ता कॉपरेटिव बैंक के तीन बार चेयरमैन रहे. वे बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकरिणी के भी सदस्य रहे. वे कल्याण सिंह की पार्टी में शामिल हो गए थे.

 

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