राजनीति हर चीज को संभव करने की कला मानी जाती है और इसमें माहिर लालू जिस तरह इन दिनों ब्राह्मणों का प्रशस्तिगान कर रहे हैं, वह इसी की पुष्टि करता है.
राजद सर्वेसर्वा ने हाल ही में अपने बेटे तेज प्रताप से ब्राह्मण महासभा के एक सदस्य के पांव छूने को कहा जो राजद के समर्थन का आश्वासन देने वहां आए थे. बेशक इस तरह का व्यवहार उन लालू यादव से एकदम अलग है, जो कभी ब्राह्मणों के नियमों, आचरण और परंपराओं की खूब खिल्ली उड़ाया करते थे.
कइयों का मानना है कि लालू अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं, जिन्होंने बिहार में एक भी ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है. राजग के ब्राह्मण वोटों को खींचने में वे कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते.