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पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़, प्रदेश अध्यक्ष का पुतला फूंका, कई उम्मीदवार निर्दलीय लड़ने को भी तैयार... दो लिस्ट जारी होने के बाद ही राजस्थान BJP में बवाल

राजस्थान में बीजेपी की दो लिस्ट जारी होने के बाद से पार्टी के अंदर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है. इसका सबसे ज्यादा असर जयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, अलवर, बूंदी और उदयपुर में देखा जा रहा है. नाराज कार्यकर्ता कहीं सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं टिकट कटने वाले उम्मीदवार निर्दलीय लड़ने की बातें कह रहे हैं.

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बीपेजी (फाइल फोटो)
बीपेजी (फाइल फोटो)

राजस्थान में विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. पूरे राज्य में एक ही चरण में 25 नवंबर को मतदान होना है. बीजेपी की बात की जाए तो पार्टी अब तक उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी कर चुकी है. लिस्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों के चयन को लेकर बीजेपी कार्यकर्ता बिफर गए हैं और पार्टी का जमकर विरोध कर रहे हैं. कई जगहों पर तो यह विरोध प्रदर्शन हिंसक भी हो गया है. कार्यकर्ताओं का ज्यादा विरोध जयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, अलवर, बूंदी और उदयपुर में देखा जा रहा है. राजसमंद में तो बीजेपी दफ्तर में तक तोड़फोड़ की गई है. वहीं, चित्तौड़गढ़ में प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के घर पर पथराव हुआ है.

राजसमंद से दीप्ति माहेश्वरी को दोबारा बीजेपी प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं. बाहरी प्रत्याशी को टिकट देने से नाराज कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया है. उन्होंने स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देने की मांग की है. कार्यकर्ताओं ने कांकरोली रोड में स्थित बीजेपी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की और चुनाव सामग्री भी फाड़ दी. नाराज कार्यकर्ताओं ने बीजेपी दफ्तर के बाहर भी डेरा डाल दिया है.

चित्तौड़गढ़ में फूंका BJP अध्यक्ष का पुतला

सबसे ज्यादा हिंसक विरोध प्रदर्शन चित्तौड़गढ़ में देखा गया. यहां से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी सांसद हैं. नाराजगी की वजह चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या का टिकट कटना है, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के खिलाफ लगातार विरोध जताया जा रहा है. रविवार सुबह चित्तौड़गढ़ शहर के मानपुरा चौराहे पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष का पुतला फूंका. प्रदेश अध्यक्ष के मधुवन कॉलोनी स्थित घर पर पथराव भी किया.

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...तो निर्दलीय उतरेंगे चंद्रभान सिंह आक्या

चित्तौड़गढ़ के गुलशन गार्डन में चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि पार्टी के पास दो दिन का समय है. अगर पार्टी मुझे टिकट नहीं देगी तो भी मैं चुनाव लड़ूंगा. उदयपुर नगर निगम के उपमहापौर पारस सिंघवी ने उदयपुर में भाजपा के ताराचंद जैन को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध किया है. वह कार्यकर्ताओं के बीच भावुक हो गये और कहा कि पार्टी को पुनर्विचार करना चाहिए नहीं तो कड़ी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. इस मौके पर पारस ने असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया पर भी निशाना साधा और कहा कि वह उदयपुर की राजनीति को दूषित कर रहे हैं.

संजय सिंह के खिलाफ अलवर में नारेबाजी

अलवर शहर में संजय शर्मा को बीजेपी से टिकट मिलने के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और संजय शर्मा के खिलाफ नारे लगाए. ओम माथुर के खिलाफ भी नारे लगाए गए. मांग थी कि बीजेपी अलवर शहर के वैश्य समुदाय से किसी नेता को टिकट दे. दो बार वैश्य समुदाय से आने वाले बनवारी लाल सिंघल को टिकट दिया गया. वे दो बार विधायक बने. साल 2018 में उनका टिकट काटकर संजय शर्मा को दे दिया गया. अब दूसरी बार भी संजय शर्मा को टिकट दिया गया है.

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इधर, श्रणण बराला भी कर रहे तैयारी

सांगानेर विधायक अशोक लाहोटी का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने रविवार को बीजेपी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. समर्थकों ने टायर जलाकर उग्र प्रदर्शन किया. समर्थकों का कहना है कि क्षेत्र में बाहरी लोगों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भजनलाल शर्मा को सांगानेर विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है. चौमू विधानसभा सीट से रामलाल शर्मा को टिकट दिए जाने का विरोध बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. श्रवण बराला कर रहे हैं. डॉ. श्रवण बराला ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

टिकट तय होते ही सड़कों पर पार्टी वर्कर

कोटा दक्षिण से संदीप शर्मा को टिकट दिया गया है. इसके बाद स्थानीय बीजेपी नेता विकास शर्मा के कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. विकास शर्मा के समर्थकों ने तलवंडी चौराहे पर संदीप शर्मा 'गो बैक' के नारे लगाए. बूंदी में बीजेपी प्रत्याशी अशोक डोगरा का विरोध हो रहा है. बूंदी सीट से अशोक डोगरा लगातार जीत रहे हैं. इस बार उनका विरोधी खेमा उनका टिकट कटवाने की कोशिश में था. इस बार टिकट की घोषणा होते ही विरोधी गुट सड़कों पर उतर आया और जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया.

पहली सूची के बाद भी कटा था बवाल

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गौरतलब है कि आगामी राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा की 41 उम्मीदवारों की पहली सूची से भी पार्टी के कई सदस्यों में असंतोष फैल गया था, जो केंद्रीय नेतृत्व की निर्णय लेने की प्रक्रिया से खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे. सूची जारी होने के अगले दिन 11 अक्टूबर को सात दावेदारों और उनके समर्थकों ने पार्टी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था.

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