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Ghanaur Assembly Seat: कांग्रेस के गढ़ में विधायक हैं मदन लाल जलालपुर, फिर जीत पाएगा पंजा?

घनौर विधानसभा सीट राजनीति के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले पटियाला जिले की एक विधानसभा सीट है. पटियाला के घनौर विधानसभा क्षेत्र की गणना पिछड़े इलाकों में होती है.

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पंजाब Assembly Election 2022 घनौर विधानसभा सीट
पंजाब Assembly Election 2022 घनौर विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिछड़े इलाकों में होती है घनौर विधानसभा क्षेत्र की गिनती
  • विधायक का दावा- कराए सबसे अधिक विकास कार्य

पंजाब के पटियाला की पहचान पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से है. कैप्टन खुद पटियाला के राजपरिवार से आते हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी पटियाला से ही आते हैं. राजनीति के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले पटियाला जिले की एक विधानसभा सीट है घनौर विधानसभा सीट. पटियाला के घनौर विधानसभा क्षेत्र की गणना पिछड़े इलाकों में होती है. घनौर, चंडीगढ़ से पटियाला के रास्ते पर पड़ता है. घनौर विधानसभा नेशनल हाईवे 1 हरियाणा-पंजाब शंभू बॉर्डर से ही शुरू हो जाता है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

घनौर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इस सीट पर कांग्रेस मजबूत रही है. साल 1951 से लेकर अब तक के चुनाव नतीजों की बात करें तो इस सीट पर छह बार कांग्रेस और चार बार अकाली दल का कब्जा रहा है. 2007 में कांग्रेस के मदनलाल ने अकाली दल के अजायब सिंह को हराया था. मदन लाल को करीब 35 हजार वोट मिले थे जबकि अजायब सिंह 34 हजार वोट के साथ करीब दो हजार वोट के अंतर से हार गए थे. 2007 में जब मदन लाल पहली बार विधायक बने उस समय क्षेत्र की जनता घग्गर नदी में बाढ़ से परेशान थी. पूरा इलाका बाढ़ से जलमग्न हो गया था. विधानसभा क्षेत्र के लोग पलायन कर पटियाला शहर के सरकारी कैंप में में आ गए थे. उस वक्त मदन लाल जलालपुर ने मोटर बोट से खुद घर-घर जाकर लोगों का सहयोग किया था.

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2017 का जनादेश

पटियाला की घनौर विधानसभा सीट से कांग्रेस के मदन लाल जलालपुर विधायक हैं. मदन लाल जलालपुर को घनौर की जनता ने दूसरी बार विधानसभा में भेजा. मदन लाल 65965 वोट पाकर करीब 36 हजार वोट के भारी अंतर से विजयी रहे थे. उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी अकाली दल की बीबी मुखमेलपुर को 29408 वोट ही मिले थे. आम आदमी पार्टी की अनु रंधावा 23188 के साथ तीसरे स्थान पर रही थीं.

सामाजिक ताना-बाना

साल 2017 के चुनाव के आंकड़ों के हिसाब से देखें क्षेत्र में कुल 1 लाख 62 हजार 300 मतदाता हैं. इनमें 53 फीसदी पुरुष और 47 फीसदी महिला वोटर हैं. ये इलाका पिछड़े इलाकों में गिना जाता है. यहां की करीब 95 फीसदी आबादी गांव में निवास करती है. घनौर विधानसभा सीट भी सिख बाहुल्य सीट है. मदन लाल जलालपुर 2007 में भी घनौर सीट से विधायक रहे हैं. वे दूसरी बार विधायक हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मदन लाल जलालपुर को दूसरी बार विधानसभा पहुंचने पर अपनी सरकार में मंत्री पद से भी नवाजा था.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

61 साल के मदन लाल आठवीं पास हैं. उनका जन्म घनौर के एक गरीब परिवार में हुआ था. ठेकेदारी करने वाले मदन लाल साल 2002 में राजनीति में सक्रिय हुए और पहली बार 2007 में बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा था. बाद में अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार बनी तो ये सत्ताधारी दल के साथ हो लिए. हालांकि जल्दी ही इनका अकाली-बीजेपी से मोह भंग हो गया और इन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया.

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साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मदन लाल को कांग्रेस ने टिकट दिया लेकिन उन्हें अकाली दल की बीबी मुखमेलपुर से पराजय का सामना करना पड़ा. मदनलाल का दावा है कि सबसे अधिक विकास कार्य उनके कार्यकाल में ही हुए हैं. मदन लाल ने विकास कार्य गिनवाते हुए कहा कि क्षेत्र में कई सड़कें बनीं, कई इंडस्ट्रीज लेकर आए. हालांकि विरोधी विधायक के दावों को खारिज करते हुए कहते हैं कि यहां पर इन्होंने कोई इंडस्ट्री तो नहीं लगाई लेकिन नकली शराब की फैक्ट्रियां जरूर पकड़ी गईं जो विधायक की शह पर चल रही थीं.

 

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