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'चुनाव लड़ने के लिए मेरे पास फंड नहीं...', चंडीगढ़ में अकाली दल के कैंडिडेट ने लौटाया टिकट

बुटेरला निवासी और तीन बार पार्षद रहे 41 वर्षीय हरदीप सिंह का मुकाबला भाजपा के संजय टंडन और कांग्रेस के मनीष तिवारी से था. हरदीप सिंह के पिता गुरनाम सिंह और उनके भाई मल्कियत सिंह 2006 और 2011 में चंडीगढ़ में पार्षद थे, हालांकि, अपने कार्यकाल के दौरान उन दोनों का निधन हो गया.

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SAD चीफ सुखबीर सिंह बाद के साथ हरदीप सिंह
SAD चीफ सुखबीर सिंह बाद के साथ हरदीप सिंह

चंडीगढ़ से शिरोमणि अकाली दल (SAD) के लोकसभा उम्मीदवार हरदीप सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार ये जानकारी सामने आई है. एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, हरदीप सिंह सिंह ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि उन्हें पार्टी से कोई समर्थन नहीं मिला और  लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए धन की कमी का सामना करना पड़ रहा था.

बुटेरला निवासी और तीन बार पार्षद रहे 41 वर्षीय हरदीप सिंह का मुकाबला भाजपा के संजय टंडन और कांग्रेस के मनीष तिवारी से था. हरदीप सिंह के पिता गुरनाम सिंह और उनके भाई मल्कियत सिंह 2006 और 2011 में चंडीगढ़ में पार्षद थे, हालांकि, अपने कार्यकाल के दौरान उन दोनों का निधन हो गया. 2015 में अपने भाई की मृत्यु के बाद, हरदीप ने उनकी काउंसिल सीट संभाली. 

वह 2016 और 2021 में पार्षद के रूप में भी चुने गए. इसके अलावा, हरदीप सिंह ने वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर के रूप में भी काम किया है. पिछले सभी लोकसभा चुनावों में अकाली दल ने चंडीगढ़ में भाजपा उम्मीदवार का समर्थन किया था. हालांकि, इस बार उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने और पहली बार उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला किया है. चंडीगढ़ में लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में एक जून को मतदान होना है.

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