गाजीपुर उत्तर प्रदेश के 80 संसदीय क्षेत्रों में से एक है और इसकी संसदीय संख्या नंबर 75 है, और यह प्रदेश के चंद हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है. यहां से केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा सांसद हैं. मनोज सिन्हा भारतीय जनता पार्टी राज्य ईकाई के कद्दावर नेताओं में से एक हैं और 2017 के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद उनका नाम राज्य के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में था. मनोज सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी भी माने जाते हैं.
गाजीपुर एक प्राचीन शहर है और इसका उल्लेख वैदिक युग में भी मिलता है. 7वीं सदी में भारत की यात्रा पर आए प्रसिद्ध चीनी यात्री हुसैन सांग ने भी इस शहर का जिक्र अपनी आत्मकथा में किया है. उन्होंने इस स्थान को चंचू यानी 'युद्ध क्षेत्र की भूमि' यानी गर्जनपति (गर्जपुर) कहा.
सल्तनत काल से लेकर मुगल काल तक इस शहर का महत्व बना रहा. इसकी स्थापना 14वीं शताब्दी में जूना खान उर्फ मुहम्मद तुगलक के शासनकाल के दौरान सैय्यद मसूद गाजी ने अपने नाम पर की थी. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शहर का प्राचीन नाम गाधिपुर था जिसका 1330 में बदलकर गाजीपुर कर दिया गया. महान स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे ने इसी शहर में जन्म लिया था.
कभी था दुनिया का सबसे बड़ा अफीम का कारखाना
अंग्रेजों के काल में गाजीपुर में 1820 में दुनिया के सबसे बड़े अफीम का कारखाना स्थापित किया गया था. गाजीपुर शहर अपने हथकरघा और इत्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध हैं. अंग्रेज गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस की मृत्यु यहीं हुई थी उन्हें यहीं पर दफनाया गया. गाजीपुर के पश्चिम में वाराणसी, उत्तर में मऊ, पूर्व में बलिया, पश्चिमोत्तर में जौनपुर और दक्षिण में चंदौली जिला स्थित है.
2011 जनगणना के अनुसार, गाजीपुर जिले की कुल आबादी 36.20 लाख से ज्यादा है जिसमें 51% (18.6 लाख) आबादी पुरुषों और 49% (17.7 लाख) आबादी महिलाओं की है. इसमें 79 फीसदी आबादी सामान्य वर्ग के लोगों की है, जबकि 20 फीसदी अनुसूचित जाति और एक फीसदी अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं. यहां पर 89.3 फीसदी आबादी हिंदुओं की है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 10.2 फीसदी और 0.5 फीसदी अन्य धर्म के लोग रहते हैं. लिंगानुपात के आधार पर देखा जाए तो 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 952 है. साक्षरता में गाजीपुर की स्थिति राष्ट्रीय स्तर (74.04%) के करीब है. यहां पर साक्षरता दर 72% है जिसमें 83 फीसदी पुरुष और 60 फीसदी महिलाएं साक्षर हैं.
5 विधानसभा क्षेत्र में से 2 रिजर्व
गाजीपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र (जखनियां, सैदपुर, गाजीपुर सदर, जंगीपुर, जमनिया) आते हैं, जिसमें 2 (जखनियां और सैदपुर) रिजर्व सीट के रूप में दर्ज है. अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट जखनियां विधानसभा क्षेत्र से 2017 के चुनाव में सुखदेव भारतीय समाज पार्टी (बीजेपी) के त्रिवेणी राम ने जीत हासिल की थी. उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गरीब को 5,157 मतों के अंतर से हराया था. जबकि रिजर्व सीट सैदपुर पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है. सपा उम्मीदवार सुभाष पासी ने भारतीय जनता पार्टी के विद्यासागर सोनकर को 8,710 मतों के अंतर से हराया था.
इसके अलावा गाजीपुर सदर से बीजेपी की संगीता बलवंत विधायक हैं और उन्होंने 2017 के चुनाव में सपा के राजेश कुशवाहा को 32 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से पराजित किया था. जंगीपुर में सपा के विरेंद्र कुमार यादव ने बीजेपी के रमेश नारायण कुशवाहा को नजदीकी मुकाबले में 3,239 वोटों से हराया था. वहीं जमनिया से बीजेपी की सुनीता सिंह ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बाजी मारा था. उन्होंने बसपा के अतुल कुमार को हराया था.
3 बार जीत चुके हैं मनोज सिन्हा
गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से मनोज सिन्हा सांसद हैं और वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं. मनोज सिन्हा 3 बार यहां से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में मनोज सिन्हा ने सपा की प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को 32,452 मतों के अंतर से हराया था. चुनावी समर में 18 उम्मीदवार थे जिसमें मनोज सिन्हा को 31.11 फीसदी यानी 3,06,929 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर रही शिवकन्या को 2,74,477 (27.82 फीसदी) वोट हासिल हुए थे. वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के राधे मोहन सिंह ने बसपा के अफजल अंसारी को हराया था. अफजल अंसारी ने 2004 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और विजयी रहे थे.
60 साल के मनोज सिन्हा ने सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है. वह सामाजिक कार्यकर्ता और किसान हैं. वह गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से 3 बार सांसद रह चुके हैं. वह पहली बार 1996 में सांसद चुने गए. इसके बाद 1999 और 2014 में भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे. हालांकि उन्हें 3 बार (1991, 1998 और 2004) चुनाव में हार भी मिली.
मंत्री की साख दांव पर
मनोज सिन्हा केंद्र में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और उनके मंत्रिमंडल के ऐलान होने के बाद से ही मंत्री हैं, ऐसे में उन्हें बतौर मंत्री संसद के दोनों सदनों में मौजूद होना पड़ता है, इसलिए बतौर मंत्री उन्हें उपस्थिति रजिस्टर पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करानी होती है और न ही सदन की कार्यवाही के दौरान कोई सवाल पूछते हैं और न ही किसी तरह का निजी बिल भी पेश करते हैं. वे सरकार में बतौर मंत्री सांसदों के सवालों का जवाब देने के लिए मौजूद होते हैं.
गाजीपुर में मोदी सरकार ने विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं का काम शुरू कराया है. मनोज सिन्हा यहां के लोकप्रिय नेताओं में से हैं और उनके केंद्रीय मंत्री होने के बाद क्षेत्र को कितना फायदा मिला और यहां की जनता अपने सांसद से कितना खुश है, यह तो अगले चुनाव में पता चलेगा, खासकर तब जब प्रदेश में सपा-बसपा में गठबंधन हो चुका है और दोनों दल एक साथ चुनाव लड़ने जा रहे हैं, ऐसे में यहां भी कांटेदार लड़ाई की उम्मीद है.