छत्तीसगढ़ की दुर्ग लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विजय बघेल ने बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी की प्रतिमा चंद्रकार को 391978 वोटों के बड़े अंतर से हराया है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के विजय बघेल को 849374 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की प्रतिमा चंद्रकार को 457396 वोटों से संतोष करना पड़ा.
जानिए इस चुनाव में किसको कितने वोट मिले
23 मई को मतगणना के दिन कैसे चला रुझान
LIVE 18:35 IST- अब तक के रुझानों में दुर्ग लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विजय बघेल बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस की प्रतिमा चंद्रकार दूसरे स्थान पर हैं. देखिए अब तक किसको किसको कितने वोट मिले.
कितने फीसदी रहा मतदान
इस सीट पर तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी, जिसमें क्षेत्र के कुल 19 लाख 38 हजार 319 वोटरों में से 71.66 फीसदी ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.
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ये उम्मीदवार लड़े चुनाव
दुर्ग लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने विजय बघेल, कांग्रेस पार्टी ने प्रतिमा चंद्रकार, बहुजन समाज पार्टी ने गीताजंलि सिंह, भारतीय किसान पार्टी ने अनुराग सिंह, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्यूनिस्ट) ने आत्मा राम साहू, शिवसेना ने कमलेश कुमार, इंडिया प्रजा बंधु पार्टी ने ट्रेस्सा डेविड, भारत प्रभात पार्टी ने पीतांबर लाल निशाद को चुनाव मैदान में उतारा था. दुर्ग लोकसभा सीट पर इस बार कुल 21 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे.
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पिछली बार किसने मारी बाजी
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के ताम्रध्वज साहू ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी की सरोज पांडे को कड़े मुकाबले में हराया था. पिछले चुनाव में ताम्रध्वज साहू को 5 लाख 70 हजार 687 वोट मिले थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी सरोज पांडे को 5 लाख 53 हजार 839 वोटों से संतोष करना पड़ा था. इस लोकसभा चुनाव में 67.09 फीसदी मतदान हुए थे.
दुर्ग लोकसभा सीट का इतिहास
बीजेपी ने साल 1996 से 2009 तक दुर्ग लोकसभा सीट से लगातार 5 बार जीत दर्ज की, जिनमें से चार बार तारा चंद साहू ने जीत हासिल की. साल 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तारा चंद साहू को बीजेपी द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. नतीजतन उन्होंने राज्य में तीसरा मोर्चा खोल दिया और छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच (CSM) की स्थापना की. इसके लिए उन्होंने गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी दलों को एकजुट करने की कोशिश की. उन्होंने 2009 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. हालांकि, वे तीसरे पायदान पर रहे.
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