असम की ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट लोकसभा सीट पर चुनाव परिणाम घोषित हो गया है. बीजेपी उम्मीदवार होरेन सिंग बे ने जीत हासिल की है. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी बीरेन सिंह इंग्ती को 239626 वोटों से हराया है. इंग्ती 2014 में इस सीट से सांसद बने थे. पिछले चुनाव में उन्होंने 24095 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था.
कब और कितनी हुई वोटिंग
इस सीट पर वोटिंग दूसरे चरण में 18 अप्रैल को हुई थी जिसमें क्षेत्र के कुल 7,95,085 वोटरों में से 6,15,944 यानी 77.47 फीसदी लोगों ने वोट डाले.
कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
असम की ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट सीट अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है. इस सीट पर कांग्रेस से मौजूदा सांसद बिरेन सिंह इंग्ती उम्मीदवार थे. वहीं बीजेपी से होरेन सिंह बे, ऑटोनॉमस स्टेट डिमांड कमेटी पार्टी से होलीराम तेरांग मैदान में हैं. इस सीट से कुल 5 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे.
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2014 का चुनाव
पिछले चुनाव में इस सीट पर 77.40 फीसदी वोटिंग हुई थी. लगातार तीन बार सांसद चुने गए बिरेन सिंह इंग्ती ने 2014 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी जयराम इंगलेंग को 24095 मतों के अंतर से हराया. बिरेन को कुल 2 लाख 13 हजार 152 वोट मिले, जबकि जयराम को 1 लाख 89 हजार 57 वोट. तीसरे नंबर पर आईएनडी के चोमांग क्रो को एक लाख 82 हजार 99 वोट मिले. 11 हजार 747 वोटरों ने नोटा का बटन दबाया.
सामाजिक ताना-बाना
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित असम की स्वशासी संसदीय सीट कार्बीं आंगलोंग और दीमा हसाओ जिले में आती है. यहां एसटी समुदाय का काफी प्रभाव है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां कुल जनसंख्या 11 लाख 70 हजार 415 है. इसमें 85.01 फीसदी आबादी ग्रामीण और 14.99 शहरी है. इसमें एससी 4.21 जबकि एसटी 59 फीसदी हैं.
2014 के चुनाव में यहां कुल मतदाता 7 लाख 2 हजार 223 थे. इसमें 3 लाख 59 हजार 58 वोटर पुरुष और 3 लाख 43 हजार 172 वोटर महिलाएं थी. 2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक यहां कुल मतदाताओं की संख्या 7 लाख 68 हजार 832 है. 2009 के चुनाव में यहां 69.4 फीसदी और 2014 के चुनाव में 77.43 प्रतिशत है.
सीट का इतिहास
इस सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है. यहां से कांग्रेस बिरेन सिंह इंग्ती 7 बार सांसद रह चुके हैं. 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी बोनिली खोंगमेनने जीत दर्ज की थी. 1962 से 1971 तक लगातार तीन बार गिलबर्ट जी स्वेल नेजीत दर्ज की. 1977 में हुए छठे लोकसभा चुनाव में बिरेन सिंह ने पहली दफा जीत दर्ज की. 1985 के चुनाव में भी बिरेन ने बाजी मारी, लेकिन 1991 से 1999 तक लगातार चार बार ऑटोनोमस स्टेट डिमांड कमेटी की ओर से जयंता रोंगपी ने जीत दर्ज की. 2004 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और बिरेन सिंह ने 24129 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. उसके बाद 2009 और 2014 में भी उन्होंने अपना किला बचाए रखा.
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