scorecardresearch
 

ऐलनाबादः अभय सिंह चौटाला के सामने चौधरी देवीलाल का गढ़ बचाने की चुनौती

सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट चौधरी देवीलाल के परिवार का गढ़ रहा है. यहां देवीलाल के परिवार से जिसने भी चुनाव लड़ा, जनता ने उसके सिर पर जीत का सेहरा बांधा.

ऐलनाबाद रेलवे स्टेशन (फोटोः इंडियन रेल इंफो) ऐलनाबाद रेलवे स्टेशन (फोटोः इंडियन रेल इंफो)

  • चौटाला परिवार से जिसने भी लड़ा, उसे मिली जीत

  • अभय को चुनौती दे रहे बीजेपी के पवन बेनीवाल

हरियाणा की सियासत को लेकर चर्चा तब तक पूरी नहीं हो सकती, जब तक तीन लाल- बंसीलाल, देवीलाल और भजनलाल का जिक्र न हो. सूबे की सियासत पर कभी अच्छा दबदबा रखने वाले इन तीन लाल के 'लाल' आज जब बदले परिवेश में रसूख बनाए रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं, कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां इन परिवारों का वर्चस्व कायम है. ऐसी ही एक विधानसभा सीट है सिरसा जिले की ऐलनाबाद.

घाघरा हाकरा नदी के किनारे ब्रिटिशकाल में इस इलाके की खोज करने वाले कमिश्‍नर राबर्ट हच की पत्नी ऐलेना के नाम पर बसा ऐलनाबाद चौधरी देवीलाल के परिवार का गढ़ है. यहां देवीलाल के परिवार से जिसने भी चुनाव लड़ा, जनता ने उसके सर जीत का सेहरा बांधा.

2014 के चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जीत दर्ज कर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, तब भी ऐलनाबाद की जनता ने इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे चौधरी देवीलाल के परिवार के अभय सिंह चौटाला को विजयी बनाकर विधानसभा में भेजा.

ओमप्रकाश चौटाला का प्रतिनिधित्व

ऐलनाबाद सीट से 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के केपी सिंह विधायक चुने गए थे. हालांकि 21वीं सदी की शुरुआत में कांग्रेस का यह गढ़ आईएनएलडी के गढ़ में परिवर्तित हो गया. कहा जाता है कि शुरुआती दौर के 1968 और 1991 के विधानसभा चुनावों को छोड़ दें तो चौधरी देवीलाल परिवार का हाथ रहा, विजयश्री उसी के हिस्से आई.

1977 से 2005 तक आरक्षित रही इस सीट पर चौटाला परिवार का कोई सदस्य भले ही चुनाव नहीं लड़ा लेकिन देवीलाल के परिवार के नाम पर भागीराम पांच दफे इस सीट से विधायक रहे. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और आईएनएलडी प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला ने भी कई दफे इस सीट की नुमाइंदगी की है.

अभय चौटाला ने संभाली विरासत

सन 2009 में चौटाला ने ऐलनाबाद के साथ ही उचाना सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों सीटों से चुनाव जीतने के बाद ऐलनाबाद सीट से इस्तीफा दे दिया. उपचुनाव में उनके पुत्र अभय सिंह चौटाला ने ऐलनाबाद की विरासत संभाली. वह मैदान में उतरे और चुनावी बाजी जीत कर विधानसभा पहुंचे.

2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अभय को चुनौती देने के लिए कभी उनके सहयोगी रहे पवन बेनीवाल को मैदान में उतारा और बेनीवाल ने टक्कर दी भी. चौटाला ने बेनीवाल को 11 हजार से अधिक वोटों से शिकस्त दी थी.

भाजपा को बेनीवाल से आस

सत्ताधारी पार्टी के रूप में चुनावी रण में उतरी भाजपा को चौधरी देवीलाल परिवार के गढ़ में पवन बेनीवाल से कमल खिलाने की आस है. पार्टी ने अभय चौटाला के खिलाफ एक बार फिर बेनीवाल पर भरोसा किया है, जिन्होंने 2014 में चौटाला को कड़ी टक्कर दी थी.

देखना होगा कि क्या भाई और भतीजे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने, कई नेताओं के पार्टी छोड़ जाने और अन्य चुनौतियों से पार पाते हुए अभय अपने परिवार का गढ़ बचाने में सफल रहते हैं या बेनीवाल उनके किले को ध्वस्त करने में सफल रहेंगे.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें