
दरभंगा जिले की बेनीपुर विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) के जनता दल(यूनाइटेड) प्रत्याशी बिनय कुमार चौधरी को को जीत मिली है. उन्होंने महागठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी मिथिलेश कुमार चौधरी को मात दी है. वोटों की गिनती के दौरान कांटे की टक्कर रही, जिसके चलते जीत का अंतर महज 6,590 रहा.
बिनय कुमार चौधरी को कुल 61,416 लोगों ने वोट किया, वहीं मिथिलेश कुमार चौधरी को 54,826 वोट मिले. कुल 37.58 फीसदी वोट जेडीयू को और 33.55 फीसदी वोट कांग्रेस को पड़े.
बेनीपुर विधानसभा सीट से तीसरे नंबर पर लोक जनशक्ति पार्टी(लोजपा) प्रत्याशी कमल राम विनोद झा रहे. उन्हें कुल 17,616 वोट मिले. कुल 10.78 फीसदी लोगों ने उन्हें वोट किया. निर्दलीय प्रत्याशी राम कुमार झा चौथे नंबर पर रहे, उन्हें 6,221 वोट मिले. इस सीट पर सीधी लड़ाई महागठबंधन बनाम एनडीए की रही, जिसमें एनडीए ने बाजी मार ली. इस चुनाव में कुल 15 प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया था.

59.19 फीसदी लोगों ने किया था वोट
दरभंगा की ब्राह्मण बाहुल्य बेनीपुर विधानसभा सीट के लिए 3 नवंबर को 56.19 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे. बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र के 2 लाख 66 हजार से अधिक मतदाता अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान किया. इस विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में पुरुषों की हिस्सेदारी 52.57 फीसदी है. जबकि, 47.43 फीसदी वोट महिलाओं के हैं. पिछले यानी साल 2015 के चुनाव में करीब 1 लाख 50 हजार मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था.
इस समय सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कब्जे में है. यहां से जेडीयू के बिनय कुमार चौधरी विधायक हैं. साल 2015 के चुनाव में चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गोपाल ठाकुर को हराया था. इस बार जेडीयू और भाजपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं.
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किसके बीच कांटे की टक्कर?
जेडीयू ने इस बार बिनय कुमार चौधरी पर दांव लगाया था. जबकि, महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के टिकट पर मिथिलेश कुमार चौधरी चुनाव मैदान में थे. एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में उतरी लोक जनशक्ति पार्टी ने कमल राम विनोद झा, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने राजीव कुमार, शिवसेना ने संजीव झा को उम्मीदवार बनाया. ऐसे में बेहद रोमांचक मुकाबला हो गया था. नागार्जुन की धरती पर नीतीश कुमार का जादू चल गया और लालू यादव की गैर मौजूदगी में तेजस्वी का युवा जोश हार गया. जनकवि के तौर पर प्रसिद्ध सुविख्यात साहित्यकार बैद्यनाथ मिश्र यात्री 'नागार्जुन' का गांव तरौनी भी इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
सीट का इतिहास
बेनीपुर विधानसभा सीट का चुनावी अतीत देखें तो यहां अब तक पांच दफे ही विधानसभा चुनाव हुए हैं. बेनीपुर विधानसभा सीट के लिए साल 1967 में पहली बार वोट डाले गए थे. तब कांग्रेस के भूप नारायण झा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) के जीपी यादव को 22 हजार से अधिक वोट के अंतर से पराजित किया था.
हालांकि, 1969 के चुनाव में भूप नारायण झा को हरिनाथ मिश्रा से मात खानी पड़ी. हरिनाथ मिश्रा 13 हजार से अधिक वोट के अंतर से विजयी रहे थे. साल 1972 में भी हरिनाथ मिश्रा ही विधायक निर्वाचित हुए. तब हरिनाथ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे. इसके बाद हुए परिसीमन में बेनीपुर विधानसभा सीट का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया था.
साल 2008 में हुए परिसीमन के दौरान बेनीपुर विधानसभा सीट फिर से अस्तित्व में आई. दोबारा अस्तित्व में आई बेनीपुर विधानसभा सीट पर पहली बार साल 2010 में वोट डाले गए. जेडीयू के साथ चुनाव लड़ी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोपाल ठाकुर को चुनावी रणभूमि में उतारा. गोपाल ठाकुर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आरजेडी के हरे कृष्ण यादव को पटखनी दे दी और विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए.
2015 का सियासी समीकरण
साल 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले सूबे के सियासी समीकरण बदल चुके थे. जेडीयू, एनडीए से निकलकर आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो चुकी थी. जेडीयू ने भाजपा के मनोज ठाकुर के खिलाफ सुनील कुमार चौधरी को मैदान में उतारा और सुनील चौधरी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे. इस बार हालात तब से बिल्कुल अलग रहे. भाजपा और जेडीयू ने साथ मिलकर कमाल किया और सीट अपने नाम कर ली.