भले ही इंटरनेट आने के बाद ई-पुस्तकें लोगों के बीच पॉपुलर हो रही हैं, लेकिन नई दिल्ली में चल रहे है वर्ल्ड बुक फेयर में प्रकाशकों की मानें तो ई-पुस्तकों का दायरा बढ़ने के बावजूद प्रकाशित किताबों की धूम बरकरार है और पाठक इन्हें खूब खरीद रहे हैं.
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वहीं ई-पुस्तक आने के बाद प्रकाशकों और पाठकों के जहन में प्रकाशित किताबों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं. उन्हें लहने लगा कि ई-पुस्तकों के बाद प्रकाशित किताबों की बिक्री में कमी होगी. लेकिन वर्ल्ड बुक फेयर में कुछ और ही देखने को मिला.
दरअसल प्रकाशकों का कहना है कि ई-पुस्तक और प्रकाशित किताबों का बाजार अलग-अलग है. समय के साथ नए-नए माध्यम आते हैं. मगर नए माध्यम आने से पुराने की चमक फीकी नहीं पड़ती है. हालांकि उनका मानना है कि पाठक सफर के दौरान ई-पुस्तक पढ़ना या सुनना चाहेंगे लेकिन पाठकों ने किताब को सीने पर रखकर सोने या सिरहाने रखने की अपनी आदत को बदला नहीं है.
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ई-पुस्तक (इलैक्ट्रॉनिक पुस्तक) कागज की बजाय डिजिटल रूप में होती हैं जिन्हें कम्प्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल यंत्रों पर पढ़ा जा सकता है. ‘वाणी प्रकाशन’ के प्रबंध निदेशक अरुण महेश्वरी ने बताया कि जब ई-पुस्तक आना शुरू हुई तो प्रकाशकों में हलचल हुई कि अब प्रकाशित पुस्तकों को कौन खरीदेगा लेकिन यह सब हमारे लिए माध्यम साबित हुए.
वहीं उन्होंने आगे कहा कि समय के साथ नए माध्यम आएंगे जो अपने पुराने किताबों के समानांतर अपनी जगह बनाएंगे. लेकिन नए माध्यमों के आने से किताबों की बिक्री कम नहीं हुई है.
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वहीं अशोक ने कहा कि ई-पुस्तक और ऑडियो पुस्तक का जो दौर आ रहा है वो अपनी जगह बनाता जाएगा. अगर कोई सफर में होगा या चल रहा होगा या जल्दी में होगा तो वह ई-पुस्तक पढ़ेगा या ऑडियो पुस्तक सुनेगा, लेकिन जब उसके पास वक्त होगा और वह आराम से पढ़ना चाहेगा तो वह प्रकाशित किताब ही पढ़ेगा. इसलिए ई-पुस्तक और प्रकाशित किताब का बाजार अलग है और इनमें कोई विरोधाभास नहीं है.